पटना, : ओडिसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की तरह ही सभी राजनीतिक दलों से लोकसभा में 33 प्रतिशत सीटों पर महिलाओं को प्रत्याशी बनाने की अपील करते हुए डा. जगन्नाथ मिश्र ने कहा कि देश में 18वीं लोकसभा चुनाव के लिए तैयार है, क्योंकि जहां राजशाही तंत्र में राजा मां के पेट से पैदा होता था वहीं लोकतंत्र में ईबीएम नेता पैदा करती है। लोकतंत्र में जैसे पुरूषों को अधिकार मिले हैं वैसे ही अधिकार महिलाओं को भी मिले हैं उसी तरह से महिलाओं को भी मौलिक अधिकार मिले हुए होते हैं। 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर हर युवक को वोट का भी अधिकार मिल जाता है। लोगों को उनके अधिकरों के प्रति सचेत  करने केलिए जागरूकता अभियान भी चलाये जाते हैं और स्त्री-पुरूष समानता का भ्ीा संविधान में प्रावधान है मगर आजादी के 72 वर्ष पूरे होने पर भी महिलाओं से राजनीति में दूसरे दर्जे की नागरिक जैसा व्यवहार हो रहा है।

पुरूष प्रधान समाज 21 वीं सदी में भी महिलाओं पर तरह तरह के प्रतिबंध ठोकता रहता है जबकि पिछले 72 सालों से हर  वर्ष महिला दिवस मनाया जाता है और महिला सशक्तिकरण की बात पूरे साल चलती है। क्योंकि राजनीतिक दलों के लिए महिला सिर्फ वोट का माध्यम बने हुए हैं मगर जमीनी तौर पर बेटियों से मितने सियासी दल न्याय कर रहे हैं इसका खुलासा महला आरक्षण की मांग से हो रहा हे। पिछले 40 साल से राजनीति में महिला आरक्षण की मांग उठ रही है। राजनीतिक दल महिला आरक्षण पर घडिय़ालू आंसू बहाते हुए एक दूसरे पर बिल का विरोध करने की ताल ठोकते रहते हैं मगर उन राजनीतिक दलों के दिल पर हाथ रखकर देखा जाये तो पता चलता है कि वह महिला आरक्षण के प्रति कितने गंभीर हैं। कई बार संसद में महिला आरक्षण बिल पर संसद में जमकर हंगामा भी हुआ, मगर देश की संसद में तो महिला आरक्षण पर चर्चा तक नहीं हुई, क्योंकि पुरूष प्रधान समाज आज भी महिलाओं को दूसरे दर्जे की नागरिक समझता है।


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