पटना : पाटलिपुत्रा लोकसभा क्षेत्र में छह विधानसभा क्षेत्र दानापुर, मनेर, विक्रम, पालीगंज, मसौढ़ी एवं फुलवारी शरीफ है। इसमें तीन मनेर, पालीगंज एवं मसौढ़ी में राजद विधायक एवं विक्रम विधानसभा में कांग्रेस जीत दर्ज की थी। वहीं दानापुर से भाजपा एवं फुलवारी शरीफ सीट जदयू खाते में गयी थी। यह यादव बाहुल्य क्षेत्र होने के चलते राजद का गढ़ जाना जाता है।  लेकिन इस क्षेत्र से राजद एक बार भी जीत नहीं सकी। प्रथम बार पाटलिपुत्रा संसदीय चुनाव में राजद सुप्रीमो  लालू प्रसाद यादव व खुद प्रत्याशी थे। लेकिन लालू  प्रसाद यादव के करीबी माने जाने वाले जदयू प्रत्याशी डा. रंजन यादव से हार का सामना करना पड़ा था।





उस समय मीडिया में खासे चर्चा हुई थी कि लालू यादव का यादव जाति से पकड़ ढि़ला पड़ गया है। जिससे राजद सुप्रीमो अपने नजदीकी जदयू उम्मीदवार डा. रंजन यादव से हार का सामना करना पड़ा। इस खेल में जदयू के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सक्रियता एवं जाति विशेष के नाराजगी ने राजद सुप्रीमो को हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। इसके बाद 2014 के  लोकसभा चुनाव में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पुत्री डा. मीसा भारती को प्रत्याशी बनाया गया तो इनसे असंतुष्ट राज्यसभा सांसद रामकृपाल यादव का राजद से मोहभंग होते देख भाजपा ने अपनी पारी खेलते हुए पाटलिपुत्रा का उम्मीदवार बनाकर राजद सुप्रीमो की खुशियां छीनने में कामयाब रहे। जिससे  राजद उम्मीदवार डा. मीसा भारती 25 हजार के अंतर से भाजपा प्रत्याशी रामकृपाल यादव से चुनाव हार गयी। राजद ने इस बार अपना प्रत्याशी राजद के राज्यसभा सांसद डा. मीसा भारती को बनाने की की चर्चा चल रही है। लेकिन डा. मीसा राज्यसभा में साढ़े चार वर्षों तक सांसद है इससे वहां के मतदाता पेशोपेश में हैं। वहीं भाजपा के केन्द्रीय मंत्री रामकृपाल यादव को फिर से उम्मीदवार बनाया है।
श्री यादव अपने क्षेत्र में सभी जाति- धर्म में लोकप्रियता हासिल है ऐसे में मजबूत उम्मीदवार की तलाश में राजद कार्यकत्र्ता लगा रहे हैं। इसमें सबसे ऊपर पूर्व केन्द्रीय मंत्री डा. कांति ङ्क्षसह का नाम है। राजद के विधायक डा. रामानंद यादव का कहना है कि  अगर राजद सुप्रीमो की पुत्री डा. भारती चुनाव लड़ेगी तो वहां उम्मीदवार नहीं होगे। मनेर विधायक भाई वीरेन्द्र, राजद अध्यक्ष देवमुनी सिंह यादव इत्यादि की चर्चा चल रही है। उधर महागठबंधन के वोट बैंक के गणित भाकपा माले के गोपाल दास को खड़ा करने में लगे हुए हैं। वहीं बसपा का चुनाव में प्रत्याशी उतारने से राजद का पसीना छूट रहा है।

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