पटना : 17वीं लोकसभा चुनाव के अवसर पर भूमि सुधार, बटाईदारी एवं खेतों में मजदूरों की समस्याओं जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सभी राजनीतिक दलों से चुनावी घोषणा पत्र मे प्रमुखता देने की अपील करते हुए डा. जगन्नाथ मिश्र ने कहा कि 1990 के बाद सामाजिक न्याय की सरकार गरीबी ओर पिछड़ों के नाम पर चलायी गयी है लेकिन भूमि वितरण की विषमाताओं को पाटने की दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया है। देश के किसी भी दूसरे राज्य की तुलना में जमीन वितरण अत्यधिक  विषम है। भारत की तुलना में बिहार में सीमांत भूमि की संख्या का अनुपात काफी बड़ा है। बिहार की स्थिति शेष भारत की तुलना में काफी गंभीर है। बिहार में भूमि समस्या में बटाईदारी एक प्रमुख समस्या है। इसी प्रकार से बासगीत पर्चाधारियों को बास स्थल से बेदखल करना, सरकारी भूमि, गैर मजरूआ आम, हदबंदी से फाजिल भूमि एवं भूदान की जमीन से बेदखल करना बदस्तूर जारी है। राज्य सरकार इस बेदखल को मूकदर्शक की तरह देखती रही है।

उन्होंने बताया कि बंधोपाध्याय कमीशन के मुताबिक बटाईदारों को अधिकार देने और उन्हें बेदखल नहीं करने के संबंध मेंअनुशंसा की गयी है, परन्तु निहित स्वार्थ के दबाव में उसे तो ठंडे बस्ते में डाला गया है। 10 लाख से अधिक गृहविहीन परिवारों को प्रति परिवार तीन डी. बास भूमि उपलब्ध करना, पर्चाधारियों को भूमि पर कब्जा दिलाना, सरकारी भूमि, भूदान की भूमि पर बसे भूमिहीनों को बासगीत का पर्चा देने, हदबंदी से फाजिल, सरकारी जमीन, भूदान की जमीन का वितरण, बटाईदारों की बेदखली पर रोक, सीमांत, लघु एवं गरीब खेतिहरों का ऋण माफ करने, खेत मजदूरों के लिए कानून बनाने, खेत मजदूरों के लिए कल्याण बोर्ड का गठन करने जैसी महत्वपूर्ण मांगों को पूरा करने की दिशा में सामाजिक न्याय की सरकारों ने कोई कारगर कार्रवाई आज तक नहीं की। यह अत्यंत ही विस्मयकारी लगता है, क्योंकि इन्हीं वर्ग के लोगों को भ्रमित कर उनका समर्थन लिया जाता रहा है।


Share To:

Post A Comment: