पटना :भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने ब्लॉग स्पॉट पर अपना विचार व्यक्त कर कहा कि  आज आप सभी से थोड़े भारी दिल से मैं मुखातिब हूं। इस बार की हमारी होली भी फीकी रही, क्योंकि पहले तो पुलवामा में हुए कायराना हमले में हमारे जवानों का बलिदान हुआ।   हमारे बीच से मनोहर पर्रिकर का जाना भी दुखद रहा।आज हालांकि दुख के साथ क्षोभ और गुस्सा है। क्षोभ इस बात का है कि कुछ राजनीतिक दलों ने राजनीति के लिए देश, राष्ट्र और सेना सब कुछ से समझौता कर लिया है। खासकर, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की अगर बात करें तो ऐसा लगता है कि हम अपने यहां के किसी राजनीतिक दल से नहींए बल्कि पाकिस्तान की भाषा सुन रहे हैं। आपने देखा होगा कि कांग्रेस अध्यक्ष के सलाहकार सैम पित्रोदा ने जो संयोगवश उनके पिता के भी गुरु रहे हैं, किस कदर हमारी सेना और देश का अपमान किया है,उनका बयान आपत्तिजनक ही नहीं, आपराधिक है। वह आखिर कहना क्या चाहते हैं, उनके बयान से तो भारत की आक्रमणकारी की छवि बनती है, जो असल में पिछले 70 वर्षों से आतंकवाद और परोक्ष युद्ध का शिकार है। राहुल गांधी की पार्टी से यह कोई नयी बात नहीं है। सिद्धू हों, मणिशंकर अय्यर हों या फिर गुलाम नबी आजाद हों, सभी ने आपत्तिजनक बयानों की लड़ी लगा दी है। संदीप दीक्षित ने तो सेनाध्यक्ष को ही गुंडा तक बता दिया है। आज तक हालांकि, कांग्रेस ने इनके बयानों पर न तो माफी मांगी है, न ही इनको कोई सजा दी है। जब खुद कांग्रेस अध्यक्ष ही आदतन झूठे हैं, तो उनके बाकी नेताओं का सवाल ही क्या है।राहुल गांधी को यह बताना चाहिए कि जब पूरी दुनिया भारत के साथ खड़ी है, तो वे पाकिस्तान के साथ क्यों खड़े हैं, यह तुष्टीकरण की राजनीति न केवल कांग्रेस के चरित्र को दिखाती है, बल्कि शहीदों का लगातार अपमान करने की उनकी नीयत को भी दिखाती है। जनता उनको पूरी तरह समझ चुकी है और इस बार वे दहाई का मुंह नहीं देख पाएंगे, ऐसा हमें पता है। राजनीति हम सभी करते हैं, पर वह राजनीति शहीदों के खून पर, सेना के ऊपर सवाल उठाकर, सेना का अपमान कर, नहीं हो सकती है। कांग्रेस को माफी मांगनी चाहिए।इन सभी बातों के साथ ही हम आपको याद दिलाना चाहेंगे कि हम सभी बीच चुनाव में हैं। तमाम बातों के बावजूद जीवन का व्यापार तो चलता ही रहता है। हम बिहार की सभी 40 सीटों पर आप सभी मतदाताओं के आशीर्वाद के आकांक्षी हैं। महामिलावटी गठबंधन का हाल तो आपको पता ही है। उसके मुख्य नेता तो प्रेस-कांफ्रेंस तक में आने से अंतिम मौके पर कतरा गए। यही नहीं, बलात्कार की सजा काट रहे एक नेता की बीवी को टिकट देना भी उनके चाल, चरित्र और चिंतन को दर्शाता है।


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