पटना : लोकसभा चुनाव की प्रथम एवं द्वितीय चरण की अधिसूचना जारी होते ही राजनीति सरगर्मी परवान चढ़ गयी है। लेकिन महागठबंधन में सीटों के बंटवारा नहीं होने से कांग्रेस एवं राजद के बीच खीचातान जारी है। महागठबंधन के सभी घटक दल के नेता दिल्ली में जमे हुए हैं। कांग्रेस अपनी वर्षों से खोई हुई ताकत क्षेत्रिय पार्टियों के साथ गठबंधन कर मुख्यधारा में आना चाहती है। वहीं राजद अपनी परंपरागत सीटों को कांग्रेस के खाते में जाने नहीं देनार चाहती। क्योंकि कांग्रेस का आधार वोट भाजपा के साथ जुड़ गयी है। राजद के वोट बैंक पर कांंग्रेस अपनी कुनबा बढ़ाना चाहती है।

उधर राजद के नेता तेजस्वी यादव ने कांग्रेस को 36 घंटे के अन्दर मामले को सुलझा लेने का अल्टीमेटम देते हुए बुधवार को प्रेस कॉन्फे्रंस करने की पेशकश की है। उसमें महागठबंधन के सभी घटक दल कौन कौन शामिल होते है यह देखना बाकी है। कांग्रेस ने पहले ही 11 सीटों पर अपनी भावी प्रत्याशी उतारने की घोषणा की थी जिसमें राजद के कई परंपरागत सीटे शामिल है। राजद किसी भी सूरत में परंपरागत सीटे छोडऩा नहीं चाहता। कांग्रेस खाते में आठ सीटें देने को तैयार है। वहीं दवाब बनाने के लिए हम से. के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कांग्रेस के बाद पार्टी के सीट बंटवारे में पांच सीट मांग रही है। वहीं रालोसपा के उपेन्द्र कुशवाहा भी सीट शेयरिंग में बढ़ा-चढ़ाकर मांग रहे हैं। इससे महागठबंधन में उहा-पोह की स्थिति बन गयी है। उधर वाम मोर्चा के घटक दल भी महागठबंधन में सात सीट मांग रहे हैं। इन सभी घटक दलों के बीच कीचकीच को देखते हुए जनाधार वाले नेता पेशोपेश में फंस गये हैं।


उधर राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि अगर विपक्ष सीट बंटवारे में सफल हो गये तो सभी सीटों पर लड़ाई रोचक हो जायेगी। एनडीए गठबंधन के घटक दल जदयू 15, भाजपा 17 एवं लोजपा ने 6 सीटों का बंटवारा कर नामों का चयन कर लिया है। वे केवल महागठबंधन के पहलवानी पर नजर गड़ाये हुए हैं।  जनता भी सीट शेयरिंग को देखते हुए चुप्पी साध ली है। वहीं केन्द्रीय नेतृत्व ने चुनाव में तीसरा मोर्चा बनाकर आर-पार की लड़ाई लडऩे के लिए राह आसान बनाने में जुट गये हैं।
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