पटना : ललित नारायण मिथिलाविश्वविद्यालय, दरभंगा का ‘नवम दीक्षांत समारोह’ आज डा. नागेन्द्र झा स्टेडियम, दरभंगा के भव्य व रंगारंग परिवेश में आयोजित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि बिहार के राज्यपाल-सह-कुलाधिपति लालजी टंडन ने सारस्वत साधना के लिए प्रसिद्ध मिथिला की बौद्धिक संपदा की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए युवा पीढ़ी को विवेकानंद के हवाले से एक विचार या संकल्प को जीवन का अंग बनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने ‘भूमंडलीकरण’ के दौर में ग्लोबल और लोकल के बीच सुखद संतुलन के साथ भारतीयता के संरक्षण और संवद्र्धन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं में राष्ट्रीयता की उद्दाम लहरें प्रवाहित हो रही हैं। पुलवामा में हुए आतंकी हमलों का प्रतिकार करते हुए देश ने अपने प्रचंड पौरूष को प्रकट किया है। राष्ट्रवाद हमारा राष्ट्रधर्म बनता जा रहा है। आतंकवाद को समूल उखाड़ फेंकने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। महामहिम ने बिहार के गौरवपूर्ण अतीत नालंदा और विक्रमशिला का स्मरण करते हुए बिहारी छात्र-छात्राओं की मेधा का उल्लेख किया। आज की युवा पीढ़ी की उपलब्धियां बिहार के बाहर उच्च शिक्षा की खबर बनती हैं, लेकिन बिहार की उच्च शिक्षा खबर नहीं बन पाती है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि पिछले दो सत्रों के 51 स्वर्ण पदकों में 31 स्वर्ण पदक छात्राओं को मिले हैं, जो महिला सशक्तिकरण के प्रमाण हैं।

उन्होंने कहा कि हम उस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए प्रयत्नशील हैं, जो नयी पीढ़ी की आंखों में सपना और होठों पर मुस्कान लाने में सक्षम हो। महामहिम ने नैक से मूल्यांकन, सत्र नियमितिकरण एवं विजन 2030 के लिएविश्वविद्यालय-प्रबंधन की प्रशंसा की। महामहिम ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यूजीसी के अध्यक्ष प्रो. डी. पी. सिंह की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि इसविश्वविद्यालय में अब संसाधनों की बारिश होगी। दीक्षांत समारोह’ के मुख्य वक्ता विश्वविद्यालय अनुदान आयोग’ के अध्यक्ष प्रो. धीरेन्द्र पाल सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा जीवन की अनवरत यात्रा का सनातन पहलू है जो मानव हितों के संरक्षण हेतु नवीन मार्ग प्रशस्त करती है। प्रो. सिंह ने उच्च शिक्षण संस्थाओं से ऐसे धरातल के निर्माण की अपेक्षा की, जहां शिक्षा-दीक्षा के कार्य को परम उदात्त ध्येय के रूप मेें पुरूषार्थ माना जाए। शिक्षा के द्वारा समर्पण, प्रतिबद्धता, पारदर्शिता, सत्कार, सत्य, निष्ठा और ईमानदारी जैसे मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देने का प्रयास होना चाहिए। प्रो. सिंह ने सीबीसीएस पाठ्यक्रम, ई पाठशाला, योग्यता संवद्र्धन पाठ्यक्रम, छात्र-संघ निर्वाचन, क्रीड़ा एवं सांस्कृतिक गतिविधियों तथा नैक से मूल्यांकन के संदर्भ मेंविश्वविद्यालय की प्रशंसा की।

कुलपति प्रो. सुरेन्द्र कुमार सिंह ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए सत्रों के नियमितीकरण को उपलब्धि बताया और आगामी नबम्बर में दशम दीक्षांत समारोह के आयोजन की भी उद्घोषणा की। प्रो. सिंह ने गुणात्मक शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए शिक्षकों की कमी को दूर किये जाने हेतु किए गए सार्थक प्रयासों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि तरंग- 2018, पूर्वी क्षेत्र महिला क्रिकेट एवं पूर्वोत्सव का आयोजन कर विश्वविद्यालय ने अपनी दक्षता का परिचय दिया है। प्रो. सिंह ने यूनिसेफ, एलएलएफ एवं राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के साथ शैक्षिक विकास हेतु किए गए समझौते की चर्चा की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय समेत 37 कॉलेजों का नैक से मूल्यांकन गुणात्मक शिक्षा के संवद्र्धन की दिशा में एक गंभीर प्रयास है। ‘इनोवेटिव स्टार्ट अप इन्क्यूवेशन सेंटर’ हेतु 7 करोड़ की राशि स्वीकृत होने को एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कुलपति ने सबके सहयोग की अपेक्षा की।

दीक्षांत समारोह में सत्र 2015-17 एवं 2016-18 के कुल 52 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक से महामहिम द्वारा सम्मानित किया गया। साथ ही 2018 के पीएचडी डिग्री धारकों को प्रमाण-पत्र दिए गए। महामहिम के कर कमलों से प्रख्यात चिकित्सक पद्मश्री डा. सीपी ठाकुर एवं मिथिला पेंटिंग की शिखर-साधिका पद्मश्री गोदावरी दत्ता को क्रमश: डीएससी एवं डी. लिट् की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के उत्तराद्र्ध में नवनिर्मित प्रयोगशाला भवन का उद्घाटन महामहिम ने रिमोट से किया।

इस अवसर पर महामहिम के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह, कुलसचिव कर्नल निशिथ कुमार राय, दरभंगा की महापौर बैजंती खेडिय़ा, विधायकगण संजय सरावगी, फैयाज अहमद, डा. फराज फातमी, भोला यादव, विधान पार्षद दिलीप कुमार चौधरी समेत अधिषद्, अभिषद् एवं विद्वत परिषद् के कई सदस्यगण उपस्थित थे।


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