पटना : राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानन्द तिवारी ने कहा कि लालू औघड़ हैं, अपना ज्यादातर फैसला दिल से करते हैं,दिमाग़ से नहीं,दिमाग़ से फैसला करने वाला पहले अपना नफा नुकसान तौलता है,तदनुसार फैसला करता है, दिल से फैसला करने वाला नफा नुकसान नहीं देखता है।नीतीश और लालू में यही फर्क है, जीतन राम मांझी का प्रकरण याद कीजिए 2014 के लोक सभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को चुनौती देने वाले नीतीश बुरी तरह पराजित हुए थे, भय था कि विरोधी उपहास उड़ाएंगे।  दल के भीतर भी हार की लाज से बचना था, चतुर नीतीश ने तुरूप का चाल चला और जीतन राम मांझी को अपनी जगह पर मुख्यमंत्री बना दिया।  एक तीर से कई निशाना ,विरोधी इस चाल से हतप्रभ हो गए। चारणों ने शोर मचाया  एक महादलित के लिए, समाज के अंतिम पायदान के व्यक्ति के लिए यह एक एतिहासिक कुर्बानी है का शोर मचाया जाने लगा।  इस त्याग और कुर्बानी पर अख़बारों में संपादकीय लिखे गए थे।लेकिन चतुर से चतुर व्यक्ति भी कभी-कभी चुक कर जाता है, नीतीश जी भी चुक गए।  जीतन बाबू को उन्होंने माटी का मुरत समझा था,उनको पहचान नहीं पा थे पहचानते भी कैसे ,जिस समाज से जीतन जी आते हैं उस समाज के लोग फैल कर कर नहीं अपने को सिकोड़ कर रखते हैं। जैसे बत्तीस दांतो के बीच जीभ अपने को बचाकर रखती है।लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर से जीतन जी ने जब अपने सामाजिक अनुभवों के साझा करना शुरू किया तो लगा कि यह आदमी माटी का मुरत नहीं है। नीतीश जी हिलने लगे, पैरों के नीचे से ज़मीन ही खिसकने का ख़तरा दिखाई देने लगा। अनहोनी हुई ,मंत्री अपने मुख्यमंत्री के आदेश को चुनौती देने लगे थे। पार्टी प्रवक्ताओं से गाली दिलवाई गई, महदलित के लिए कुर्बानी के निर्णय को ग़लत माना गया। इसके लिए बिहार की जनता से माफी मांगी गईण्ताल-तिकड़म लगा कर जीतन बाबू को मुख्यमंत्री की कुर्सी से उतारा गया।उन्हीं जीतन जी ने नीतीश से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई और आज अपनी पार्टी के अध्यक्ष हैं,हालांकि अपनी पार्टी के अकेले विधायक हैं। लेकिन गठबंधन में उन्हें लोकसभा का तीन और विधान सभा का एक सीट लडऩे को मिला है, लोग चकित हैं,एक विधायक वाली पार्टी को लोक सभा का तीन सीट । यह सब लालू की महिमा और जीतन बाबू के व्यक्तित्व का कमाल है।  बहुतों को शंका है,लेकिन अपने अनुभव के आधार पर मैं भविष्यवाणी कर सकता हूँ,जीतन राम मांझी के तीनों उम्मीदवार विजयी होंगे।



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