पटना : महागठबंधन के सुत्रधार शरद यादव 03 अप्रैल को मधेपुरा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार के रूप में मधेपुरा समाहरणालय पर्चा दाखिल करेंगे। नामांकन में बिहार विरोधी पक्ष के नेता तेजस्वी यादव, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री हम पार्टी के अध्यक्ष जीतन राम मांझी, रालोसपा के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा, भीआईपी पार्टी के अध्यक्ष मुकेश सहनी जी प्रमुख रूप से शामिल रहेंगे।  शरद यादव के राजद उम्मीदवार के रूप में मैदान में आ जाने से मधेपुरा वासियों में खुशी की लहर है।

पिछले पांच वर्षों में मधेपुरा एवं देश का जो राजनीतिक एवं संवैधानिक क्षति हुआ है, जिसका भरपाई शरद यादव लोकसभा में पहुंचकर करेंगे। देश में व्याप्त अराजकता, आर्थिक अपातकाल, संवैधानिक संकट, समप्रदायिकता जैसी गंभीर समस्याओं को संसद में उठाकर कानुन के रूप में तब्दिल कर देश में व्यवस्था परिवर्तन करने का काम करेंगे। महागठबंधन बिहार के सभी 40 लोकसभा सिटों पर जीत दर्ज करेगी एवं देश में एनडीए की सरकार खत्म करेगी। बिहार हमेशा परिवर्तन की धरती रही है। जब-जब बिहार करवट लिया है, देश की सत्ता और व्यवस्था में बदलाव हुआ है। पिछले 2014 के चुनाव में बिहार की जनता ने सबसे अधिक सिटें एनडीए को दिया था, पर प्रधानमंत्री मोदी का सरकार जुमला सरकार बन कर रह गयी। देश में प्रत्येक वर्ष 02 करोड़ लोगों को रोजगार देना, आयुष्मान भारत, कौशल विकास, सभी नागरिकों के खातों में 15 लाख रूपया देना, महंगाई पर रोक लगाना, स्मार्ट सिटी बनाना, बुलेट ट्रेन चलाने जैसे सारे वादे जुमला साबित हो गया। 2019़ के चुनाव में बिहार की 11 करोड़ जनता नरेन्द्र मोदी के वादाखिलाफी का जबाव बटन बदाकर देगी।

बिहार सरकार के मुखिया नीतीश कुमार जनता सबक सिखायेगी। नीतीश कुमार बिहार को विशेष दर्जा, विशेष पैकेज एवं विकास के सवाल पर महागठबंधन को तोड़ा था। नीतीश जी को भी बिहार की जनता कुर्सी से बेदखल करेगी और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में बिहार में नई सरकार बनेगी।


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