हमारे सनातन धर्म में कुछ ऐसी परंपराएं हैं, जिसका महत्व तो बहुत है, लेकिन समय के साथ-साथ उसका प्रचलन कम हो रहा है। ऐसी ही एक प्रथा तिलक लगाने की है। प्राचीन काल में जब भी राजा, महाराजा शुभ कार्यों के लिए जाते थे तो माथे पर तिलक लगवाकर जाते थे। अगर कोई राजा और महाराजा युद्ध के लिए भी जाते थे, तो विजय के लिए अपने ईष्ट देव को याद करते थे और माथे पर तिलक लगाकर जाते थे। इस सम्बन्ध में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त ज्योतिष योग शोध केन्द्र, बिहार के संस्थापक दैवज्ञ पंo आरo केo चौधरी "बाबा-भागलपुर", भविष्यवेत्ता एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ ने शास्त्रानुसार बतलाया कि:- माथे पर तिलक लगाने के साथ-साथ सनातनी   परंपराओं में गले, हृदय, दोनों बाजू, नाभि, पीठ, दोनों बगल आदि मिलाकर शरीर के कुल बारह स्थानों पर तिलक लगाने का विधान है। वैसे शास्त्रों में विस्तार से मस्तिष्क पर तिलक लगाने के महत्व के बारे में बताया गया है। हालांकि, अब तो इस विधान को वैज्ञानिक भी मानने लगे हैं। शोधकत्ताओं का मानना है कि मस्तक पर तिलक लगाने से शांति और ऊर्जा मिलती है। भारत में कई तरह के तिलक प्रचलित हैं। चंदन, गोपीचंदन, सिंदूर, रोली, भस्म इत्यादि। ऐसे में अब सवाल ये उठता है कि किस दिन कौन-सा तिलक लगाकर घर से शुभ कार्यों के लिए प्रस्थान करें। जिससे हर कार्यों में सफलता मिले और मस्तिष्क को शांति और शीतलता मिले। सनातन धर्म में शैव, शाक्त, वैष्णव व अन्य मतों के अलग-अलग  तिलक होते हैं। चंदन का तिलक लगाने से पापों का नाश होता है। व्यक्ति संकटों से बचता है। उस पर लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है। ज्ञान चक्षु संयमित व सक्रिय रहते हैं। चंदन कई प्रकार के होते हैं। मुख्य रूप से हरि चंदन, गोपी चंदन, सफेद चंदन, लाल चंदन, गोमती और गोकुल चंदन को विशेष रूप से प्रभावशाली माना जाता है। दिन के अनुसार धारण:- 1. सोमवार:-सोमवार का दिन भगवान शंकर का दिन होता है तथा इस दिन का स्वामी ग्रह चंद्रमा है। चंद्रमा मन का कारक ग्रह माना गया है। मन को नियंत्रित रखकर मस्तिष्क को शीतल और शांत बनाए रखने के लिए सफेद चंदन का तिलक  लगाया जाता है। इस दिन विभूत या भस्म भी लगा सकते हैं। 2. मंगलवार:- मंगलवार को हनुमानजी का दिन तथा शक्ति साधना का दिन माना गया है। इस दिन का स्वामी ग्रह मंगल है। मंगल लाल रंग का प्रतिनिधित्व करता है। इस दिन लाल चंदन या चमेली के तेल में घुला हुआ सिंदूर का तिलक लगाने से ऊर्जा और कार्यक्षमता में विकास होता है। इससे मन की उदासी और निराशा हट जाती है और दिन शुभ व्यतीत  होता है। 3. बुधवार:- बुधवार को जहाँ माँ  दुर्गा का दिन माना गया है वहीं यह भगवान गणेश का दिन भी है। इस दिन का ग्रह स्वामी बुध ग्रह है। इस दिन सूखे सिंदूर (जिसमें कोई तेल न मिला हो) का तिलक लगाना चाहिए। इस तिलक से बौद्धिक क्षमता तेज होती है और दिन शुभ रहता है। 4. गुरुवार:- गुरुवार को बृहस्पतिवार भी कहा जाता है। बृहस्पति ऋषि देवताओं के गुरु हैं। इस दिन के खास देवता ब्रह्मा जी हैं। इस दिन का स्वामी ग्रह  बृहस्पति ग्रह है। गुरु को पीला या सफेद मिश्रित पीला रंग प्रिय है। इस दिन सफेद चन्दन की लकड़ी को पत्थर पर घिसकर उसमें केसर मिलाकर लेप को माथे पर लगाना चाहिए या टीका करना चाहिए। हल्दी या गोरोचन का तिलक भी लगा सकते हैं। इससे मन में पवित्र और सकारात्मक विचार तथा अच्छे भावों का उद्भव होगा जिससे दिन भी शुभ व्यतीत  होगा और आर्थिक परेशानी का निवारण भी हो सकता है। 5. शुक्रवार:- शुक्रवार का दिन भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मीजी का रहता है। इस दिन का ग्रह स्वामी शुक्र ग्रह है। हालांकि इस ग्रह को दैत्यराज भी कहा जाता है। दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य थे। इस दिन लाल चंदन लगाने से जहाँ तनाव दूर रहता है वहीं इससे भौतिक सुख-सुविधाओं में भी वृद्धि होती है। इस दिन सफेद चन्दन या सिंदूर भी लगाया जा सकता है। 6. शनिवार:- शनिवार को माँ काली, भैरव, शनि और यमराज का दिन माना जाता है। इस दिन के ग्रह स्वामी है शनि ग्रह। शनिवार के दिन विभूत, भस्म या लाल चंदन लगाना चाहिए जिससे माँ काली, भैरव महाराज प्रसन्न रहते हैं और किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने की सम्भावना रहती है और दिन शुभ रहता है। 7. रविवार:- रविवार का दिन भगवान विष्णु और सूर्य का दिन है। इस दिन के ग्रह स्वामी सूर्य ग्रह है। जो ग्रहों के राजा हैं। इस दिन लाल चंदन या हरि चंदन लगाया जाता है। भगवान विष्णु की कृपा रहने से जहाँ मान-सम्मान बढ़ता है वहीं निर्भयता आती है। माथे पर तिलक लगाने के चमत्कारी लाभ और इसके नियम यही है।
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