शास्त्रों में गायत्री मंत्र की महिमा बताई गई है। यह महामंत्र यजुर्वेद से लिया गया गया है। ऐसा माना जाता है कि इस मंत्र के उच्चारण और इसे समझने से ईश्वर की प्राप्ति होती है। इस सम्बन्ध में अन्तर राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त ज्योतिष योग शोध केन्द्र, बिहार के संस्थापक दैवज्ञ पंo आरo केo चौधरी उर्फ बाबा-भागलपुर भविष्यवेता एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ ने शास्त्रानुसार बतलाया कि:- गायत्री एक छंद है जो ऋग्वेद के प्रसिद्ध सात छंदों में से एक है। इस छंद में आठ-आठ अक्षरों के तीन चरण होते हैं। दैनिक जीवन में कई लोग इस मंत्र का जाप करते हैं। शास्त्रानुसार उल्लेखनीय है कि गायत्री मंत्र:- ऊँ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।। इस मंत्र का अर्थ:- सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परामात्मा के तेज का हम ध्यान करते है, परमात्मा का वह तेज हमारी बुद्धि को सद्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करें।

जाप करने का सही समय:– गायत्री मंत्र जाप के लिए तीन समय बताए गए हैं, जाप के समय को संध्याकाल भी कहा जाता है।

1. गायत्री मंत्र जाप करने का सबसे अच्छा समय सुबह होता है। सूर्योदय से थोड़ी देर पहले मंत्र का जाप करना चाहिए। जाप सूर्योदय के बाद तक करना चाहिए।

2. गायत्री मंत्र जाप के लिए दूसरा शुभ समय दोपहर और तीसरा समय शाम को सूर्यास्त से कुछ देर पहले का माना जाता है। सूर्यास्त से पहले मंत्र जाप शुरू करके सूर्यास्त के कुछ देर बाद तक जाप करना चाहिए।

3. यदि संध्याकाल के अलावा गायत्री मंत्र का जाप करते हैं तो मौन रहकर या मानसिक रूप से करना चाहिए। मंत्र का जाप तेज आवाज में नहीं करना चाहिए।

इस मंत्र का जाप करने से मन में उत्साह और सकारात्मकता बढ़ती है। माना जाता है कि इसके जाप से ललाट में चमक आती है। मन से बुराइयों का अंत होता है। क्रोध शांत होता है। ज्ञान में वृद्धि होती है तथा मनोकामना की पूर्ति और सिद्धि प्राप्त होती है।


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