पटना, (रिर्पोटर) : भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं उजियारपुर के सांसद नित्यानंद राय ने भाजपा के स्थापना दिवस पर ब्लॉग लिखकर उद्गार व्यक्त कर संदेश दिया कि भाजपा मेरे लिए पार्टी मात्र नहीं, घर-परिवार के समान। भारत के प्रति पार्टी के दृष्टिकोण ने मुझे सबसे अधिक आकर्षित किया, जहां पर राष्ट्र प्रथम व सर्वोपरि, फिर पार्टी और सबसे आखिर में खुद को रखना सिखाया जाता है।

उन्होंने कहा कि आज भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस है। बड़े हर्ष और गौरव के साथ यह क्षण आपसे साझा कर रहा हूं। मैं इतिहास का छात्र रहा हूं और उसी समय मैं सभी राजनीतिक पार्टियों पर शोध भी कर रहा थाए उनको देख रहा था और प्रयोग भी कर रहा था। विभिन्न कालों के अध्ययन के दौरान मैंने देखा कि भाजपा बाकी पार्टियों से अलग तरीके से काम करती है। मेरा कॉलेज खत्म हो रहा था और मैं इतिहास के हिसाब से देखूं तो चीजें अलग थीं। भाजपा की बैठकें जहां भारत माता की जय से शुरू होती थीं। वहीं दूसरी पार्टियों में कोई अपने वंश-परिवार का तो कोई व्यक्ति विशेष का नारा लगा रहा था। भारत के प्रति पार्टी के दृष्टिकोण ने ही मुझे सबसे ज्यादा आकृष्ट किया। भारत के प्रति पार्टी के दृष्टिकोण ने ही मुझे सबसे अधिक आकर्षित कियाए जहां राष्ट्र प्रथम, फिर पार्टी और सबसे आखिर में खुद को रखना सिखाया जाता है।

श्री राय ने बताया कि मेरी राजनीति में रुचि थी और मैंने राजनीतिक सफर की शुरुआत विद्यार्थी परिषद से की। हम छात्रों को भारतीय सांस्कृतिक आधार पर निर्मित करते थे और नए भारत के निर्माण की सोच के तहत काम करते थे। छात्र ही इस देश के कल का नागरिक है, छात्र कल का सजगए संस्कारी और समाज निर्माण से जुड़ाए देश का निर्माण करनेवाला नागरिक बनेए विद्यार्थी परिषद इसी लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ती है। इसी बीचए मैंने संघ का द्वितीय वर्ष पूर्ण कर लिया और फिर भाजपा से जुड़ा। इस तरह मेरे राजनैतिक और सामाजिक जीवन की शुरुआत हुई। हालांकिए सामाजिक जीवन तो पहले भी चल रहा था। लेकिन इसके साथ मैंने समाजसेवा का व्रत लिया और सक्रिय राजनीति शुरू की।

उन्होंने बताया कि राजनीतिक तौर पर सक्रिय और उसमें रुचि रखने के कारण मैं भाजपा के साथ दूसरी पार्टियों के काम को भी देखता रहता था। भाजपा में मुझे सबसे खास बात यह लगी कि इस पार्टी की कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं था। विद्यार्थी परिषद में जब मैं सक्रिय था तो मैंने दीनदयाल जी के विचारों का अध्ययन किया तो पता चला कि कोई भाजपा के आस.पास भी नहीं था। जहां सबका निशाना सत्ता.सुख किसी भी तरह पाना थाए वहां ये बहुत बड़ा अंतर था। मैंने दीनदयाल जी के आर्थिक चिंतन को देखा तो पाया कि यदि किसी गरीब के पास एक रुपया हो तो हिंदुस्तान के सबसे अमीर आदमी के पास दस रुपया हो। दूसरी बातए वह संघर्ष की बात नहीं करते थे, सौमनस्य और सौहार्द की बात करते थे। वे मानते थे कि गरीब को झोंपड़े से निकालकर मकान में लाइए, लेकिन किसी अमीर के घर पर हमला करना सही नहीं है।

उन्होने कहा कि भाजपा ऐसी पार्टी है, जहां सामान्य कार्यकर्ता भी सर्वोच्च पद पर पहुंच सकता है। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रधानमंत्री जी इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। मैं भी एक साधारण कार्यकर्ता था, पर पार्टी ने मुझ पर भरोसा कर प्रदेश अध्यक्ष बनाया। यह किसी और दल में नहीं हो सकता। भाजपा कार्यकर्ताओं की है, किसी परिवार की बपौती नहीं है। यह सबसे बड़ा अंतर है।


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