पटना, (राजीव नंदन त्रिपाठी) : सीमांचल में तीसरे चरण का होने वाला चुनाव में तीन वर्तमान सांसदों के भाग्य का फैसला होना है। मतदाता पुन: इन्हें दिल्ली दरबार पहुंचते हैं या बाहर का रास्ता दिखाते हैं। झंझारपुर, सुपौल, अररिया, मधेपुरा एवं खगडिय़ा लोकसभा में 23 अप्रैल को चुनाव होना है। इनमें मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र पर बिहार ही नहीं देश की नजरें भी टिकी है। कहा जाता है कि रोम पोप का और मधेपुरा गोप का। बिहार महागठबंधन में इस सीट को लेकर घटक दलों के बीच काफी खिचखिच हुई। कांग्रेस और राजद दोनों अपना अपना प्रत्याशी उतारना चाहते थे। राजद ने अपने कोटे से लोजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव को चुनाव मैदान में  उतारा वहीं राजद के धुर विरोधी माने जाने वाले वर्तमान सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने चुनावी मैदान में उतरकर चु नाव को काफी रोमांचक बना दिया है। पप्पू यादव पिछले चुनाव में शरद यादव को हराकर सांसद बने  हैं।
नेपाल की तराई से सटा अररिया लोकसभा क्षेत्र बाहुल्य क्षेत्र है इस क्षेत्र से 2014 के चुनाव में राजद प्रत्याशी मो. तस्लीमुद्दीन चुनाव जीतने में सफल हुए थे। 2018 में उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में तस्लीमुद्दीन के पुत्र सरफराज आलम चुनाव जीते। वहीं इस बार भी राजद ने इन्हें अपना प्रत्याशी ब नाया है। इनका मुकाबला भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार सिंह से है। प्रदीप कुमार 2009-14 तक सांसद रह चुके हैं। दोनों में कोई जीतते हंै तो दुबारा सांसद बनेंगे। 1998 में पहली बार इस क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी रामजी दास ऋषिदेव चुनाव जीतने में सफल हुए थे। सुपौल लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी सह वर्तमान सांसद  रंजीता रंजन की लड़ाई एनडीए के घटकदल  जदयू प्रत्याशी दिलेकेश्वर कामत से है। पिछले चुनाव में भी रंजीता रंजन ने दिलकेश्वर कामत को हरा चुकी है।
झंझारपुर लोकसभा क्षेत्र से समाजवादी  जनता दल डेमोके्रटिक प्रत्याशी सह पूर्व सांसद देवेन्द्र प्रसाद यादव के चुनाव में उतरने से यहां का च ुनाव दिलचस्प के साथ त्रिकोणात्मक होने का साफ असर दिखने लगा है। इस क्षेत्र से भाजपा मोदी लहर में 2014 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी वीरेन्द्र कुमार चौधरी, राजद प्रत्याशी मंगनी लाल मंडल को हराकर सांसद बने।  इस बार के चुनाव में एनडीए सीट शेयरिंग में यह क्षेत्र जदयू के हिस्सा में मिला। जदयू ने यहां रामप्रीत मंडल को चुनावी मैदान में उतारा है।
खगडिय़ा लोकसभा क्षेत्र से एनडीए के घटक दल लोजपा प्रत्याशी सह वर्तमान सांसद महबूब अली कैसर का मुकाबला महागठबंधन के घटक दल  वीआईपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी से है। सहनी पहली बार चुनावी मैदान में हैं। बताया जाता है कि इन्हें अपनी जातीय मतदाताओं पर अच्छी पकड़ है। इसी जाति से आने वाले राजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र सहनी भी अपना भाग्य आजमा रहे हैं। लोकसभा चुनाव में राजद अपनी पुरानी माय समीकरण के अलावे अन्य मतदाताओं के आस पर चुनाव जीतने का दंभ भरती है। वहीं अन्य दलों के प्रत्याशी जातीय मतदाताओं के अलावे पार्टी के कैडर वोट समेत अन्य मतदाताओं के  सहारे चुनावी नैया पार करने में जुटी है।

Share To:

Post A Comment: