बेगूसराय, (राजीव नंदन त्रिपाठी) : भूमिहार बाहुल्य क्षेत्र बेगूसराय में इस बार होने वाला लोकसभा का चुनाव किस राजनीतिक दल का कब्जा होगा यह चुनाव परिणाम के बाद ही देखने को मिलेगी। यह क्षेत्र पहले कम्यूनिस्ट का गढ़ माना जाता रहा है लेकिन 2014 के लोकसभा चुाव में भाजपा के भोला सिंह ने जीत हासिल करने में फसलीभूत रहे। बेगूसराय में भूमिहार, यादव व मुसलमान के अलावे अन्य जातिय मतदाताओं का रूझान जस पार्टी को मिलती है उसी की जीत होती है। इस बार कम्यूनिस्ट पार्टी ने पुन: जीत हासिल करने को लेकर जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष एवं देश विरोधी नारे लगाने से चर्चा में आये कन्हैया कुमार को चुनावी मैदान में उतारा है। वहीं भाजपा अपनी सीट के लिए हिन्दूवाद का राग अलापने वाले नवादा के सांसद गिरिराज सिंह को कन्हैया के खिलाफ चुनावी जंग में उतारा। दोनों भूमिहार जाति से आते हैं। यहां छठे चरण का मतदान 12 मई को होना है। पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी भोला ङ्क्षसह ने राजद प्रत्याशी तनवीर हसन को मात दिये थे।
बेगूसराय में आमने सामने की चुनावी जंग को महागठबंधन के राजद प्रत्याशी तनवीर हसन चुनावी दंगल को त्रिकोणात्मक बनाने में जुटे हैं। इस चुनाव में भाकपा माले को छोड़ अन्य वाम मोर्चा को महागठबंधन में जगह नहीं मिली है। बेगूसराय सीट भाजपा एवं कम्यूनिस्ट पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का विषय है। सांसद भोला सिह के निधन के बाद से यह क्षेत्र रिक्त पड़ा था। ग्रामीण सूत्रों के अनुसार बताया जाता है कि कम्यूनिस्ट प्रत्याशी कन्हैया अखबार व सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ नहीं दिखता नजर आ रहा है। भाजपा के लिए भी यह सीट बरकरार रखने के लिए कठिन संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है। वहीं राजद प्रत्याशी के पक्ष में जीत हासिल करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोडऩा चाह रही है। अब तो चुनाव परिणाम के बाद ही पता चल पायेगा कि यहां की जनता किसके हाथों बेगूसराय क्षेत्र को सौपती है।

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