पटना, (रिर्पोटर) : नियोजित शिक्षकों के मामले में पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को लेकर हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा ने दुख जताया है।   पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ दानिश रिज़वान ने कहा कि आज का दिन बिहार के शिक्षा जगत के लिए निराश करने वाला दिन है जब एक ही काम के लिए शिक्षकों को अलग अलग वेतन दिए जा रहे हैं दानिश ने कहा कि बिहार के नियोजित शिक्षकों को आज सुप्रीम कोर्ट से ख़ासा उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट उनके साथ न्याय करेगा परंतु राज्य की नीतीश सरकार के द्वारा कोर्ट में दिए गए बेतुके हलफ़नामे और ज़िद के कारण आज सिर्फ नियोजित शिक्षकों को ही नहीं बल्कि उन तमाम संविदा पर रखे गए सरकारी कर्मचारियों की उम्मीदों को झटका लगा है जिनको लगता था कि राज्य सरकार उनकी नियुक्ति नियमित कर उनके और उनके परिवार के साथ न्याय करेगी। हम प्रवक्ता ने कहा कि इसके पूर्व तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतन राम माँझी के द्वारा न केवल संविदा पर रखे गए कर्मचारियों को नियमित किया गया था बल्कि नियोजित शिक्षकों को भी समान काम के बदले समान वेतन दिया गया था परन्तु कुर्सी की चाहत में नीतीश कुमार ने जीतन राम माँझी जी को सत्ता से बेदख़ल करते हुए ख़ुद बिहार की बागडोर संभाली और उनके तमाम फैसलों को निरस्त कर दिया जिसमें नियोजित शिक्षकों के समान काम के बदले समान वेतन का भी मामला था।उसके बाद भी नीतीश कुमार यहीं नहीं रुकें और जब पटना उच्च न्यायालय से नियोजित शिक्षकों को राहत मिली तो सुप्रीम कोर्ट पहुँच गये और शिक्षकों को न्याय से वंचित कर दिया।   हम प्रवक्ता ने कहा कि विधानसभा चुनाव के पुर्व जब भारतीय जनता पार्टी के साथ हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा का गठबंधन हुआ था तो उस वक़्त भी तय हुआ था कि बिहार में अगर राजग की सरकार बनती है तो नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन दिया जाएगा परंतु जनादेश हमारे पक्ष में नहीं मिला।  दानिश ने कहा कि अगर सूबे में महागठबंधन की सरकार बनती है तो किसी भी स्थिति में नियोजित शिक्षकों को उनका अधिकार मिलेगा और समान काम के बदले समान वेतन दिया जाएगा,दानिश ने यह भी कहा कि राज्य में कांट्रैक्ट बेसिस पर जितने भी कर्मचारी है सबको नियमित कर उनके परिवार के साथ न्याय किया जाएगा


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