मोतिहारी, (रिर्पोटर) : पूर्वी चंपारण लोक सभा सीट पर घमासान मची हुई है। एक तरफ जहां भाजपा से राधा मोहन सिंह केंद्रीय कृषि एवं किसान  कल्याण मंत्री हैं तो दूसरी ओर गठबंधन से पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. अखिलेश प्रसाद सिंह राज्यसभा सांसद के पुत्र आकाश प्रसाद सिंह हैं। तीसरे मुख्य प्रत्याशी हैं प्रभाकर जायसवाल, जिन्होंने भाकपा का झंडा थामा है और भारतीय कम्यूनिस्ट  पार्टी के उम्मीदवार हैं। राधा मोहन सिंह की उम्र सत्तर वर्ष है और आकाश प्रसाद सिंह की उम्र सत्ताइस वर्ष और प्रभाकर जायसवाल 45 की उम्र के हैं। त्रिकोणीय लड़ाई में एक तर फ जहां राजपूत भूमिहार और वैश्य है वहीं चौथे प्रत्याशी कायस्थ जाति से राजीव रंजन श्रीवास्तव हैं। राधामोहन सिंह पांच बार से सांसद होते आ रहे हैं और डा. अखिलेश प्रसाद सिंह एक बार यहां से राजद के टिकट पर सांसद चुने गए थे उस समय वे राजद में थे अभी कांग्रेस के राज्य सभा सदस्य हैं। अभी  उनके पुत्र आकाश प्रसाद सिंह रालोसपा से लड़ रहे है। प्रभाकर जायसवाल खेल जगत का एक जाना पहचाना नाम है। स्पोर्टस क्लब के सेक्रेटरी हैं और उनके नेतृत्व में जिले में खेल को गति मिली है साथ  साथ राष्ट्रीय स्तर पर चंपारण के खिलाडियों की पहचान भी बनी है। चम्पारण के खिलाड़ी बड़े बड़े शहरों में गए और वहां नाम रोशन कर के मोतिहारी आये।
नए दल से लड़ रहे राजीव रंजन श्रीवास्तव की उम्र 50 के आस-पास  होगी और विदेश में बड़ी नौकरी पर थे लेकिन राजनीति को उन्होंने अपने जीवन का कैरियर बनाया और वहां की नौकरी छोडक़र के राजनीति के माध्यम से समाज सेवा के लिए आये हैं। घोषणा पत्र में उन्होंने बताया है कि मैं सेवा भावना से आया हॅू और चाहता हॅू कि जिले का विकास हो और मैं इसके लिए अपना जीवन राजनीतिक क्षेत्र को दिया हूं। वर्तमान समय राजनीतिक क्षेत्र में जो बदलाव आया है उसमें पैसा धन बल और शक्ति का ही वर्चस्व है और समाज सेवा एवं विकास आदि तमाम बातें चुनाव के समय गौण हो जाते हैं। जातीय गणित के आधार पर ही राजनीतिक दल टिकट भी देते हैं। निवर्तमान जो सांसद होते हैं वे ही कुछ हद तक इससे  बच पाते हैं लेकिन अन्य जो भी प्रत्याशी अलग अलग दलों से आते हैं उनके पीछे जाति धर्म का कितना सपोर्ट है उस वर्ग मे कितनी ताकत है और कितनी संख्या है यही मुख्य मायने रखता है।
बाहरी प्रत्यासी विनोद श्रीवास्तव यहां से लोक सभा और विधान सभा का चुनाव लडकर हारे हैं इस बार उनका क्षेत्र बना हुआ था, लेकिन गठबंधन मे रालोसपा के खाते मे सीट जाने से उनका टिकट कट गया।

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