पटना, (रिर्पोटर) :केंद्र और राज्य के डबल इंजन से बिहार के विकास को गति मिलने की बात कहते हुए प्रदेश भाजपा प्रवक्ता सह पूर्व विधायक राजीव रंजन ने कहा यह किसी से छिपा नही है कि  एनडीए सरकार के सत्ता में आने पहले बिहार की क्या दशा थी. राजद-कांग्रेस की जोड़ी ने बिहार को किस तरह बदहाली के कगार पर पंहुचा दिया था. स्थिति यह थी कि सत्ता में बैठे राजद-कांग्रेस के नेतागण बिना कुछ करे धरे करोड़पति बनते चले गए वहीँ आम अवाम को बुनियादी सुविधाएं भी नसीब नही थी. राज्य से बाहर रहने वाले बिहारी अपनी पहचान छिपाने को मजबूर थे. लेकिन 2005 में नीतीश जी के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनते ही स्थितियों में क्रांतिकारी बदलाव आया जिसका साक्षी आज पूरा देश है. यह बिहार ही है जिसने आधी आबादी को उसका वाजिब हक देते हुए उन्हें पंचायत चुनावों में 50 फीसदी और सरकारी नौकरियों में 35 फीसदी का आरक्षण देने की शुरुआत की. इसके अलावा ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन के लिए जीविका जैसी परियोजना की शुरुआत की, जिसकी तारीफ आज अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर होती है. आज इस परियोजना के तहत 8.70 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह शुरू हो चुके हैं. बिहार के विकास में 2014 के बाद और तेजी आ गयी है. आंकड़ो को देखें तो मोदी सरकार ने पांच सालों के अपने कार्यकाल में बिहार के विकास को जितनी प्राथमिकता दी है, उतनी किसी सरकार ने नही दी थी.  याद करें तो कांग्रेस ने  13वें वित्त आयोग के तहत बिहार को केवल 1 लाख 93 हजार करोड़ रुपये दिए गए जबकि 14वें वित्त आयोग में मोदी सरकार द्वारा राज्य को 4 लाख 33 हजार 803 करोड़ रुपये अर्थात ढाई गुना ज्यादा आवंटित किये गए हैं, जिससे बिहार के चतुर्दिक विकास को मजबूती मिली है. इसके अलावा केंद्र सरकार ने पुल-पुलियों और सड़कों के विकास के लिए बिहार को तकरीबन 50 हजार करोड़ रुपए अलग से दिए हैं जिसके कारण पिछले चार सालों में बिहार की सड़कों की लंबाई पहले की अपेक्षा तीन गुणा ज्यादा बढ़ चुकी है, इसने बिहार के विकास में नए पंख लगा दिए हैं. यह एनडीए सरकार के सुशासन की ही देन है कि आज बिहार के सभी घरों में बिजली पंहुच चुकी है. वहीँ लगभग सभी घरों में रसोई गैस, पेयजल और शौचालय जैसी मुलभुत सुविधाएं भी आ चुकी है. आज बिहार का स्वच्छता कवरेज 93 फीसदी तक पंहुच चुका है. यह नमो-नीतीश की जोड़ी की अथक मेहनत का ही परिणाम है कि कभी नेगेटिव विकास दर रखने वाला बिहार आज देश में सबसे अधिक 11.3 प्रतिशत की विकास दर रखने वाला राज्य बन चुका है. विशेषज्ञ भी अब मानते हैं कि अगर बिहार का विकास ऐसे ही चलता रहा तो बिहार को विकसित श्रेणी में पंहुचने से कोई नही रोक सकता.


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