पटना, (रिर्पोटर) :  अधिवेशन भवन में आयोजित ऊर्जा विभाग की विभिन्न योजनाओं के कार्यारंभ व उद्घाटन समारोह को सम्बोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बिहार में पिछले 5 साल में बिजली प्रक्षेत्र पर 55 हजार करोड़़ रुपये तथा पिछले वित्तीय वर्ष में बजट आवंटन 10,257 करोड़ था, मगर 12,117 करोड़ रु.खर्च किए गए। इसका परिणाम विगत लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान दिखाई दिया कि सर्वाधिक तालियां बिजली के लिए बजती थी। श्री मोदी ने कहा कि 2012 के 37 लाख की तुलना में विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या 2019 में बढ़ कर 1 करोड़ 48 लाख हो गयी हैं। 2018-19 में बिजली उपभोक्ताओं ने 9,072 करोड़ रुपये बिल के रूप में भुगतान किया है जबकि राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं को 5,100 करोड़ सबसिडी के रूप में दिया है। घरेलु उपभोक्ताओं को 1.93 रु., कुटिर ज्योति योजना के तहत 3.98 रु. और कृषि उपभोक्ताओं को 5.11 रु. प्रति यूनिट सब्सिडी दिया जाता है। श्री मोदी ने कहा कि बिजली की उपलब्धता के कारण जहां इन्वर्टर और जेनरेटर सेट की बिक्री कम हो गयी है वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल रिचार्जिंग करने वाली दुकानें भी बंद हो गयी हैं। एक जमाना था जब बिजली के तार पर लोग कपड़ा सूखाते थे मगर अब उसमें करंट प्रवाहित होता है। वर्तमान सरकार बिजली के मामले में अंधकार से यात्रा प्रारंभ कर आज प्रकाश के पथ पर तेजी से अग्रसर है।


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