पटना, (रिर्पोटर)) : माले महासचिव काॅ दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि  मोदी सरकार की पुनर्वापसी से विगत 5 सालों की बर्बादी-तबाही और विफलताएं ढक नहीं जाती. प्रचंड बहुमत को भाजपा के लोग देश की जनता पर और ज्यादा तबाही-बर्बादी-लापरवाही का लाइसेंस न समझे. आज जो कुछ बिहार में हो रहा है क्या जनता ने इसी चीज के लिए जनादेश दिया था?  हम देख रहे हैं कि इंसेफलाइटिस से सैंकड़ो की तादाद में बच्चे मारे गए हैं. लू ने भी सैंकड़ों लोगों की जान ले ली है लेकिन सरकार पटना में दुकानदारों की दुकानें ढाहने में लगी हुई है. पटना के न्यू मार्केट में बिना वैकल्पिक व्यवस्था किएउ लंबे समय से हजारों की तादाद में दुकान लगा रहे दुकानदारों को सरकार उजाड़ने में लगी हुई है. मुजफ्फरपुर की घटना ने एक बार फिर से जाहिर कर दिया है कि बिहार सरकार का आपदा प्रबंधन बिलकुल नकारा है. बच्चों के प्रति इस प्रकार की लापरवाही घोर आपराधिक लापरवाही है और इसके लिए पूरी तरह से भाजपा-जदयू की सरकार जवाबदेह है. हम मांग करते हैं कि इंसेफलाइटिस को आपदा घोषित करते हुए युध्द स्तर पर राहत अभियान चलाए. गांव-गांव में सक्षम डॉक्टरों की टीम भेजे और इलाज में गम्भीरता लाये. बिहार में नीतीश जी की सरकार हर घर नल जल योजना की शेखी बघारते अघाती नहीं, लेकिन हकीकत यह है कि आज पूरे बिहार में घोर जल संकट है. लोगों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है. यह बहुत ही चिंताजनक है. पेयजल संकट का तत्काल समाधान किया जाना चाहिए।

नियोजित शिक्षकों के साथ क्रूर मजाक किया है. समान काम के लिए समान वेतन के सवाल पर सरकार ने शिक्षकों से धोखा किया है. हमारी पार्टी समान काम के लिए समान वेतन और सभी स्कीम वर्करों के स्थायीकरण की मांग को पुनः दुहराती है.

बिहार में शिक्षा और रोजगार की हालत दिन-प्रतिदिन खराब हो रही है. शिक्षा की गुणवत्ता में भारी गिरावट आम चर्चा का विषय बन गई है. सरकारी विद्यालयों को सरकार लगातार बन्द किये जा रही है. जहां तक रोजगार सृजन का सवाल है, तो वह पूरी तरह से ठप ही है. आजादी के पहले और उसके बाद जो भी औद्योगिक निर्माण हुए, आज वे पूरी तरह से चैपट हो गए हैं. कोई नया कल-कारखाना नहीं खुल रहा है. सरकार के दावे के विपरीत पलायन बदस्तूर जारी है और लोग हर जगह धक्के खा रहे हैं.

इन घटनाओं को विधानसभा के आगामी सत्र में भी उठाया जाएगा और सरकार से जवाब मांगा जाएगा.

 मोदी शासन का पिछला 5 साल देश के लिए एक आपदा के समान था और उसने व्यवस्थित तरीके से देश व लोकतंत्र को बर्बाद करने और देश में फासीवादी हिंसा थोपने का काम किया. मोदी-1 में सरकार की विभाजन-घृणा और घोर जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जनता के भिविन्न हिस्सों के जबरदस्त आंदोलनों के बाबजूद मोदी सरकार दुबारा जीत कर सत्ता में आ गई है, यह बिल्कुल ही अनपेक्षित व असामान्य है.  सत्ता में दुबारा आते ही भाजपा-संघ ने अपने राजनीतिक विरोधियों पर हमला बोल दिया है. इसका सबसे घृणित उदाहरण भाजपा शासित त्रिपुरा में दिखा. बिहार में आरा-बेगूसराय आदि जगहों पर भाजपा गुंडों ने आतंक का माहौल बना दिया है. एक तरफ मोदी सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास की बात करते हैं , दूसरी ओर दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं पर रोज हमले हो रहे है. पूरे देश में घृणा व अपराध की बाढ़ सी आ गई है.

बेगूसराय में एक युवक मोहम्मद कासिम से उसका नाम पूछा गया और फिर उसे उसे गोली मार दी गई. आरा में आये दिन हमले हो रहे हैं. पायल तड़वी परिघटना से लेकर अनेक जगह पुरानी बातें दुहराई जा रही है. ऐसे हमले बताते हैं कि सत्ता के मद में चूर भाजपा लोकतंत्र और अपने विरोधियों का सफाया करना चाहती है. भाजपा-संघ के इस अभियान के खिलाफ भाकपा- माले लोकतंत्र की रक्षा के लिए सभी लोकतांत्रिक शक्तियों को एकजुट करने के प्रति प्रतिबद्ध है.

पिछला 5 साल देश मे जनांदोलनों के हिसाब से भी काफी महत्वपूर्ण था. कर्ज माफी और अपने दूसरे सवालों पर किसानों, शिक्षा-रोजगार, स्किम वर्कर, दलितों-आदिवासियों, मजदूरों आदि तबकों ने अपने सवालों पर लगातार आंदोलन चलाया और उसका देशव्यापी ताप पैदा किया. अब जब मोदी की पुनर्वापसी हुई है, तो इस सरकार का दायित्व बनता है कि जनता के इन सवालों पर उचित पहलकदमी ले, यदि ऐसा नहीं होता है तो मोदी-2 की सरकार जनता के और भी बड़े व व्यापक आंदोलन का आवेग झेलने के लिए तैयार रहे. लेकिन मोदी-2 सरकार ने बहुतम हासिल करके एक बार फिर से शिक्षा, स्वास्थ्य, पब्लिक सेक्टर, श्रम कानूनों आदि में गलत दिशा अख्तियार कर ली है. आगामी 30 जुलाई से 1 अगस्त तक कोलकाता में जन कन्वेंशन और केंद्रीय कार्यशाला आयोजन किया जाएगा. 4 जुलाई को पटना के भारतीय नृत्य कला मंदिर में राज्यस्तरीय कन्वेंशन का आयोजन होगा संवाददाता सम्मेलन को राज्य सचिव कुणाल, पोलित ब्यूरो सदस्य अमर, विधायक दल के नेता महबूब आलम ने संबोधित किया।



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