पटना, (रिर्पोटर) : कृषि, पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री डा. प्रेम कुमार ने आज विद्यापति भवन में आयोजित बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ लि. के 69वीं वार्षिक आमसभा के उद्घाटन के अवसर पर कहा कि मत्स्यपालन का राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। राज्य की बड़ी आबादी मत्स्य पालन के कार्य से जुडी है तथा यह क्षेत्र बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार का अवसर उपलब्ध कराता है। सरकार राज्य में मत्स्यपालन को बढ़ावा देने के लिए कृतसंकल्पित है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कृषि रोड़ मैप में मत्स्यपालन को विशेष रूप से शामिल कर चरणबद्ध तरीके से इस क्षेत्र के विकास के लिए कार्य किया जा रहा है। मत्स्यपालन क्षेत्र में काफी तेजी से विकास हुआ है। आज राज्य में प्रतिवर्ष प्रति व्यक्ति मछली की उपलब्धता 8.79 प्रति किलोग्राम हो गया है। जो कि राष्ट्रीय औसत 10 किलोग्राम प्रति व्यक्ति से कुछ ही कम है। जल्द ही हम राष्ट्रीय औसत से भी उपर चले जायेंगे। मंत्री ने केन्द्र सरकार में पशुपालन एवं मत्स्यपालन के लिए अलग विभाग बनाये जाने तथा मत्स्यपालकों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड दिये जाने के निर्णय के लिए भारत के आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
उन्होंने कहा कि राज्य में मत्स्यपालको की समस्याओं के समाधान हेतु बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ लि. (कॉफेड) काफी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। सरकार भी मछुआरों के समस्याओं के समाधान तथा उनकी आर्थिक उन्नति के लिए कॉफेड को हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि 10 जुलाई को व्यापक पैमाने पर मछुआरा दिवस मनाया जाएगा। कार्यक्रम में उपस्थित मत्स्यपालकों द्वारा सैरातों/जलकरों/तालाबों के राजस्व में अत्यधिक वृद्धि किये जाने की शिकायत के आलोक में माननीय मंत्री ने कहा कि सरकार इस पर गंभीरता से विचार करेगी तथा इसकी समीक्षा कर मछुआरों के हित में जो भी संभव होगा किया जाएगा। माननीय मंत्री ने मछुआरों के अन्य मांगों पर भी गंभीरता से विचार करने का अश्वासन दिया।
 राज्य को मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र मे आत्मनिर्भर बनाने तथा मत्स्यपालकों की आर्थिक स्थिति को सुढृढ़ करने के लिए सरकार एक विशेष कार्ययोजना पर  कार्य कर रही है। मत्स्य उत्पादन से लेकर उसके मार्केटिंग तक के लिये प्रत्येक स्तर पर सहायता प्रदान करने हेतू योजनाबद्ध तरीके से  कार्य किया जा रहा है। नये तालाबो का निर्माण, तालाबों मे पानी की व्यवस्था के लिये बोरिंग के साथ पम्प सेट पर अनुदान का प्रावधान किया गया है । बोरिंग के लिये ईकाई लागत 50000 तथा पम्प्सेट के लिये 25000 पर 90 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान किया गया है। मछलियों के सुरक्षित मार्केटिंग एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अति पिछडी जातियों के लिये आईस बॉक्सयुक्त मोपेड, थ्री व्हीलर तथा फोर व्हीलर 90 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराने की योजना है। मोपेड के लिये 50000, थ्री व्हीलर के लिये 280000 एवं फोर व्हीलर के लिये 480000 का 90 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान किया गया है। 22 लाख रूपये की लागत से मत्स्य हैचरी की स्थापना, मत्स्य पालन हेतू उन्नत किस्म का बीज  आदि भी 90 प्रतिशत  अनुदान पर उपलब्ध कराने की योजना है। सरकार हर कदम पर राज्य के मत्स्यपलकों के साथ पूरी दृढ़ता के साथ खड़ी है।

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