पटना, (रिर्पोटर) : विधानमंडल के सेंट्रल हॉल में आयोजित बिहार विधान सभा के नवनियुक्त कर्मियों के नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को सम्बोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि कभी बीपीएससी 5-5 साल की सिविल सेवा की परीक्षाएं एक साथ आयोजित करता था मगर पहली बार 2019 में नियमित परीक्षा आयोजित की गई है। एक दौर वह भी था जब नियुक्तियों में गड़बडी की शिकायत के बाद बीपीएससी के ती-तीन चेयरमैन को जेल जाना पड़ा था। आज बीपीएससी के साथ राज्य में विभिन्न सेवाओं के लिए गठित अलग-अलग आयोगों व चयन पर्षद के द्वारा बड़े पैमाने पर पारदर्शी तरीके से नियुक्तियां हो रही हैं। श्री मोदी ने कहा कि बीपीएससी द्वारा 3400 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है। तकनीकी सेवा आयोग 2400 विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्तियां तथा 6,379 कनीय अभियंताओं की नियुक्ति की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी कर रही है। आरक्षी चयन आयोग की ओर से 9 हजार सिपाहियों की नियुक्तियां की गई हैं। राज्य विश्व विद्यालय सेवा आयोग 7 हजार से ज्यादा सहायक प्राध्यापकों की रिक्तियां एकत्र कर नियुक्ति की कार्रवाई प्रारंभ करने जा रहा है। इस वर्ष बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा परीक्षा से लेकर रिकार्ड समय में परिणाम प्रकाशित करने को ऐतिहासिक बताया और कहा कि पहली बार ऐसा हुआ है कि विरोध में छात्रों का कहीं कोई धरना, प्रदर्शन तथा असंतोष नहीं दिखा है। विधान सभा के लिए सहायक व अन्य श्रेणी के 87 कर्मियों की पारदर्शी तरीके से की गई नियुक्ति की सराहना करते हुए कहा कि आम तौर पर पहले यह माना जाता था कि यहां नियुक्तियां बिना पैरवी-पैसे की नहीं होती है। उपमुख्यमंत्री ने नवनियुक्ति कर्मियों को बधाई देते हुए कहा कि विधानमंडल की सेवा अस्थातंरणीय होता है,जिससे यहां के कर्मी एक जगह पर रह कर अपनी सेवा पूरी करते हैं।


Share To:

Post A Comment: