पटना, (रिर्पोटर) : पूर्व केन्द्रीय मंत्री सह समाजवादी जनता दल-डी के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेन्द्र प्रसाद यादव ने राज्य कार्यकारिणी की बैठक के बाद प्रेसवार्ता में कहा कि मुजफ्फपुर में गरीबों के कुपोषित बच्चों की मौत का सिलसिला  थम नहीं रहा है। केवल मौसम के बदलते हुए मिजाम का इंतजार न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि अत्यंत दुखद है। उन्होंने कहा कि जागरूकता की कमी बताने में शर्म को भी सत्तापक्ष शर्माने में कोताही नहीं करती, लेकिन इसकी जिम्मेदारी लेने से कन्नी काटती है। हर साल यह सिलसिला जानलेवा चमकी बुखार से गरीब बच्चों की मौत का सिलसिला चलता रहेगी ही क्या?
श्री यादव ने कहा कि असंवेदनशीलता का पराकाष्टा हो गया, पूरे देश में ही नहीं विदेशों में भी इस जानलेवा चमकी बुखार की चर्चा जोरों पर है। दूसरी ओर विकास का, विज्ञान और सुशासन का डंका पीटा जा रहा है। केन्द्र व राज्य सरकार अपनी विफलता को छिपाने में लगी हुई है। मीडिया से बच के निलनती नजर आती है यहां तक की मुजफ्फरपुर अस्पताल में कुपोषित बच्चों की मौत की संख्या को छिपाने की बू नरकंकाल से प्रतीत हो रहा है। इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना की न्यायिक जांच होना वक्त की मांग बन गयी है ताकि  जनता के  सामने असलियत आ सके।  उन्होंने बताया कि 80 प्रतिशत गरीब लोग बुनियादी जन सुविधाओं से वंचित हैं, कुपोषित हैं, इससे निजात जब तक नहीं मिलेगा तब तक क्या मासूमों का मौत का सिलसिला हर साल चलता रहेगा, यह यक्ष्य प्रश्न खड़ा हो गया है।
श्री यादव ने कहा कि जहां तक बिहार में इस वर्ष गेहॅू की उपज 56 लाख टन हुआ समर्थन मूल्य पर सरकार ने एक लाख टन खरीदने का लक्ष्य रखा वह भी पूरा नहीं कर सका। अब गेहॅू की किसानों को घाटे के दाम पर औने-पौने दामों में खुले बाजार में अपनी उपज को बेचने के लिए मजबूर कर दिया गया। किसान त्रस्त हैं और सरकार मस्त है। उन्होंने कहा कि दक्षिण बिहार में लू से लोगों की मौत हो रही है। प्रदेश व देश के बहुत से हिस्सों में पीने के पानी का घोर संकट है। पेयजल के लिए हाहाकार मचा हुआ है, सिंचाई सृजन क्षमता बढ़ाने की बात तो कोसो दूर है इस तरह जल संकट पर सरकार गंभीर नहीं है। साथ ही बिहार में समाजवादी व वैचारिक आन्दोलन कुंद पड़ गया है।

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