बिहारशरीफ, (रिर्पोटर) :आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय बताते हुए भाजपा प्रवक्ता सह पूर्व विधायक राजीव रंजन ने कहा “ स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह पहला अवसर था जब राजनीतिक कारणों से देश में आपातकाल लगाया गया था। 25 जून 1975 की आधी रात को आपातकाल की घोषणा की गई, जो 21 मार्च 1977 तक लगी रही। इस दौरान जनता के मूल अधिकार छीन लिए गए, उनकी स्वतंत्रता पर रोक लगा दी गई, तानाशाही शासन के द्वारा अपने मनचाहे तरीके से संविधान को ग़लत ढंग से परिभाषित किया गया। चुनाव स्थगित हो गए, राजनीतिक विरोधियों को बिना वजह कालकोठरी में डाल दिया गया और प्रेस प्रतिबंधित कर दिया गया। आपातकाल की घोषणा ने देश की लोकतांत्रिक संरचना को हिला कर रख दिया था। 12 जून 1975 को जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा ने इंदिरा गांधी के रायबरेली से सांसद के रूप में चुनाव को अवैध करार दे दिया था। अदालत ने इंदिरा गांधी के अगले छह साल तक उनके कोई भी चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी। ऐसी स्थिति में इंदिरा गांधी के पास राज्यसभा में जाने का रास्ता भी नहीं बचा। जाहिर है उनके पास प्रधानमंत्री पद छोड़ने के सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं था। इसीलिए सिर्फ अपनी सत्ता बचाने के लिए इंदिरा गांधी 25 जून, 1975 को आधी रात से आपातकाल लागू कर दिया, जिसके बाद पूरे देश में दमन और निरंकुशता का एक भयावह दौर चला, जिसे याद कर लोग आज भी सिहर उठते हैं”।


श्री रंजन ने आगे कहा “आपातकाल में देश ने करीब 21 महीने सत्ता की ओर से खौफनाक पुलिसिया दमन का दौर देखा। आपातकाल ने इंदिरा गांधी को असीमित शक्तियां दे दी थीं- जब तक चाहें वह सत्ता में रह सकती थीं, लोकसभा-विधानसभा के लिए चुनाव की जरूरत नहीं थी, मीडिया और अखबार को सेंसर कर सकती थीं, किसी भी प्रकार के कानून को पारित करवा सकती थीं और जिसे चाहें उसे मीसा-डीआईआर के तहत गिरफ्तार करवा सकती थीं। जय प्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई समेत तमाम दिग्गज नेताओं को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया था। मीसा और डीआईआर में एक लाख ग्यारह हजार लोगों को जेल में ठूंस दिया गया, क्योंकि ये सभी इंदिरा गांधी और आपातकाल का विरोध कर रहे थे। इस दौरान, जेल में दिल को दहला देने वाली यातानाएं दी गईं। जयप्रकाश नारायण को ऐसी यातना दी गई कि उनकी किडनी कैद के दौरान खराब हो गई। देश के सभी बड़े विपक्षी नेता सलाखों के पीछे डाल दिए गए, यहाँ तक कि छात्रों को भी नही बख्शा गया। आज भी कांग्रेस के किसी नेता ने इन ज्यादतियों के लिए देश से माफ़ी नही मांगी है, जो सीधे तौर पर उनके अहंकार को दर्शाता है”।


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