पटना, (रिर्पोटर) :      प्रसिद्व आर्थोपेडिक, ज्वाइंट एंड नी रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ निशिकांत कुमार  ने वल्र्ड डॉक्टर्स डे के मौके पर नी रिप्लेसमेंट के विभिन्न विकल्पों के संबंध में बताया कि क्रुसियेट रिटेनिंग नी, सी आर नी रिप्लेसमेंट यहां के मरीजों के लिए अधिक कारगर है। उन्होंने कहा कि फ्यूचर नी-रिप्लेसमेन्ट में डबल.सी (सीआर नी एवं कम्प्युटर नेवीगेशन) का अहम रोल है।  हालांकि सीआर नी रिप्लेसमेंट के लिए मरीजों को वैसे ही नी रिप्लेसमेंट सर्जन से संपर्क करना चाहिए जिन्हें इस तकनीक में दक्षता हासिल हो और इसका व्यापक अनुभव हो।  मालूम हो कि देष भर में एक जुलाई को वल्र्ड डॉक्टर्स डे मनाया जाता है।

डॉ निशिकांत ने कहा कि टोटल नी-रिप्लेसमेन्ट इस सदी की सबंसे सफल सर्जरी   में आंकी जाती हैं। टोटल नी-आथ्र्रोप्लास्टी के भी बेहद अच्छे परिणाम आए हैं। कई अघ्ययन बताते हैं कि इसमें सर्वाइवल रेट 90 प्रतिशत से अधिक है और फॉलो अप टाइम 20 वर्षों से भी अधिक है। इन सारी प्रक्रियाओं में  डयुरेबलिटी और फंक्शन को और बेहतर करने के लिए कई उपाय लगातार किए जा रहे हैं हालांकि एक विवाद जरूर है कि इस प्रक्रिया में पोजटेरियर क्रुसियेट लिगामेन्ट   रहने दिया जाये या हटा दिया जाये।

मौजूदा समय में नी-रिप्लेसमेन्ट  में इंप्लांट का विकल्प सर्जन के प्रीफरेन्स और ट्रेनिंग पर निर्भर करता है। क्रुसियेट रिटेनिंग डिजाइन पोजटेरियर क्रुसियेट लिगामेन्ट  को बचाए रखता है और इसे काटा नहीं जाता है जैसा कि पोजटेरियर स्टैबलाइज्ड डिजाइन में होता था।

 क्रुसियेट रिटेनिंग प्रोस्थेटिक डिजाइन में कुछ फायदे हैं जैसे कि प्रिजर्वेशन आफ बोन, नोर्मल नी काइनेमेटिक्स, बेहतर प्रोप्रियोसेप्सन, ऐसे में आजकल क्रुसियेटिव रिटेनिंग डिजाइन का प्रचलन काफी जोर पकड़ रहा है। इस तकनीक में घुटनों को अधिक काटने छांटने की जरूरत नहीं पड़ती है जिसका फायदा यह होता है कि मरीज अपने घुटनों को रॉल बैक कर सकता है। सीआर नी सर्जरी में कम से कम काट-छांट किया जाता है जिससे सर्जरी के दौरान कम से कम ब्लड लॉस होता है और रिकवरी में भी कम  समय लगता है।

डॉ निशिकांत ने नए टर्म डबल सी का इजाद करते हुए कहा कि भविष्य में नी रिपलेसपमेन्ट में सीआर नी एवं कम्प्युटर नेवीगेषन का अहम रोल साबित होने वाला है। डा. निशिकान्त ने कहा  कि ऐसे भी  एशियाई लोगों के घुटने छोटे होते हैं, ऐसे में सीआर नी रिप्लेसमेंट में मरीजों को पोस्ट ऑपरेटिव फ्रेक्चर की संभावना कम होती है।   नी-रिप्लेसमेन्ट के लिए किसी अन्य तकनीक  में अगर धुटनों को थोड़ा भी काटा जाएगा तो परेशानी बढ़ सकती है। इस तकनीक का सक्सेस रेट काफी बढिय़ा  है और पूरी दुनिया में एक्सपर्ट डाक्टर सीआर नी-रिप्लेसमेन्ट को तरजीह देते हैं। सीआर नी रिप्लेसमेन्ट  के लिए तकनीकी रूप से दक्ष एवं अनुभवी चिकित्सकों का होना आवष्यक है। इस तकनीक में नी रिप्लेसमेंट के बाद मरीजों को अपना घुटना होने का एहसास होता है।



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