पटना, (रिर्पोटर) : बदलते भारत के बाज़ार ने संपूर्ण विश्व के बिपणन और वित्तीय-संस्थानों को व्यापक रूप से आकृष्ट किया है। अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए ऐसी सभी व्यावसायिक संस्थानों को 'हिन्दी'की आवश्यकता महसूस हुई है और उन्हें इसमें कार्य करने के लिए विवश होना पड़ा है। बाज़ार से जुड़े हर व्यक्ति और संस्था को यह स्वीकार करना पड़ा है कि भारत की हिन्दी पट्टी हीं नहीं संपूर्ण भारत वर्ष में संचार के लिए उन्हें हिन्दी के आश्रय में जान पड़ेगा। भारत का उत्तरी भाग विशेष रूप से एक बड़े उपभोक्ता बाज़ार के रूप में सामने में आया है,जो हिन्दी की भाषा समझता है। इस दृष्टि से विचार करने पर यह कहा जा सकता है कि,हिन्दी पर बाज़ार का प्रभाव पड़ा है और बाज़ार ने,भाषा के प्रचार-प्रसार की दृष्टि सेहिन्दी के विकास में बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की है। 

यह बातें आज यहाँ बोरिंग रोड स्थित बैंक औफ़ बड़ोदा के क्षेत्रीय कार्यालय में बैंक के राजभाषा विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी में मुख्यअतिथि के रूप में बोलते हुएबिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। डा सुलभ ने कहा कि भाषा और साहित्य में एक मौलिक अंतर है। बोलचाल और संवाद के लिए जो भाषा होती हैवह मोटे तौर पर सरल और बोधगम्य होती है। साहित्य की भाषा किंचित परिष्कृत और अलंकृत होती है। सामान्य बोलचाल में शब्दों और भाषा के रूप बिगड़ने का ख़तरा तो होता है। किंतु व्यापकता की दृष्टि से यह ख़तरा उठाया जा सकता है। किंचित ध्यान देने से भाषा परिष्कृत हो जाती हैहो जाएगी।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए,बैंक के महाप्रबंधक नित्यानंद बेहेरा ने कहा कि हिन्दी जन-संपर्क की सशक्त भाषा है। यही कारण है कि सीधे-सीधे व्यवसाय से जुड़ी कंपनियाँ एवं संस्थाएँ हिन्दी को सहज रूप में स्वीकार कर रही हैं। उन्होंने व्यापारिक घरानों द्वारा उपभोक्ताओं को आकर्षित करने वाले हिन्दी के सूत्र-वाक्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि हिन्दी आज बाज़ार की सबसे बड़ी भाषा बन चुकी हैजिसके बिना कारोबार सफल नहीं हो सकता। यह कोमल और सरस भाषा है जिसका अधिकाधिक प्रयोग होना चाहिए। 

बैंक के उप महाप्रबंधक मनीष कौरा,कैप्टन प्रवीर भारती तथा प्रियरंजन प्रकाश ने भी अपने विचार व्यक्त किए । अतिथियों का स्वागत बैंक के उप क्षेत्रीय प्रमुख श्री सुभाष चंद्रा ने किया मंच का संचालन और संयोजन राजभाषा अधिकारी चंदन कुमार वर्मा ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन मुख्य-प्रबंधक चंद्र किशोर गुप्ता ने किया। इस अवसर परसामाजिक कार्यकर्ता आनंद मोहन झा समेत बड़ी संख्या में बैंक के अधिकारी और हिन्दी प्रेमी उपस्थित थे।

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