रांची, (रिर्पोटर) :  मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि मुख्यमंत्री सुकन्या योजना लागू होने के बाद से ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं की शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। गांव की बच्चियां शिक्षित हो जायेंगी, तो राज्य के पलायन भी रूकेगा और कुपोषण पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा। कम उम्र में विवाह रूकने से मातृत्व व शिशु मृत्यु दर में कमी आयेगी। इस योजना में ज्यादा से ज्यादा लाभूकों को जोड़ें। उक्त बातें मुख्यमंत्री ने झारखंड मंत्रालय में महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के कार्यों की समीक्षा के दौरान कहीं।  श्री दास ने कहा कि गांवों में जागरूकता फैलाने के लिए आंगनबाड़ी सेविकाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। सभी सीडीपीओ को निर्देश दें कि आंगनबाड़ी सेविकाओं के साथ बैठक कर उन्हें महिलाओं व बच्चों को कुपोषण से मुक्त कराने संबंधी जानकारी दें। आंगनबाड़ी सेविकाओं को सप्ताह में दो दिन गांव में चौपाल लगा कर गर्भवती महिलाओं को उनके खान-पान, चिकित्सा परामर्श आदि के प्रति जागरूक करें। साथ ही प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत उनका पंजीयन भी करायें। झारखंड में एक लाख महिलाओं का पंजीयन अभी कराया जाना बाकी है। इस कार्य की थर्ड पार्टी जांच भी करायी जायेगी। जिन जिलों में कम उम्र में शादी होने की ज्यादा सूचनाएं आती हैं, उन जिलों को प्राथमिकता दें। पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सितंबर में रन फॉर पोषण का आयोजन किया जायेगा। जिसे पूरे झारखंड में चलाया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि तेजस्विनी योजना से राज्य की किशोरियों व युवतियों को काफी लाभ होगा। इस योजना को जल्द ही सभी 17 जिलों में शुरू करें। इस योजना में उन्हें प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ा जायेगा। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के तहत रामगढ़ व दुमका में अब तक 52,793 युवतियों को जोड़ा जा चुका है और 576 तेजस्विनी क्लब का गठन किया जा चुका है। इस योजना को तीन जुलाई से सभी 17 जिलों में शुरू किया जा रहा है। इससे 10 लाख किशोरी व युवतियों को जोड़ते हुए 12 हजार तेजस्विनी क्लब का गठन किया जायेगा। सितंबर तक गरीबों के बीच वितरण होने वाले कंबल के क्रय की कार्रवाईपूरी करें. जाड़े का इंतजार ना करें. अक्टूबर में वितरण सुनिश्चित करें. सामाजिक सुरक्षा विभाग जिलों के माध्यम से यह कार्य सुनिश्चित करेगा.  श्री दास ने कहा कि ट्रैफिकिंग की समस्या का ठोस निदान जरूरी है, नहीं तो गरीबी के कारण बच्चियों को फिर से दूसरे राज्यों में ले जाकर काम कराने का सिलसिला नहीं रूकेगा। रांची में उनके लिए एक अलग आवासीय परिसर बनेगा। इसमें 18 साल से ज्यादा उम्र की बच्चियों को कौशल विकास के तहत प्रशिक्षित कर झारखंड में ही रोजगार दिया जायेगा। झारखंड में ही रोजगार मिलने से उन्हें कामकाज के लिए बाहर नहीं जाना होगा। इनसे छोटी बालिकाओं को पढ़ाई सरकार करायेगी। सरकार इन सभी को साइकिल भी देगी, ताकी इन्हें प्रशिक्षण लेने व स्कूल जाने में सुविधा हो। मुख्यमंत्री सुकन्या योजना के तहत अब तक 60 हजार बच्चियों को जोड़ा गया है। इस वर्ष 2,90,169 बच्चियों को जोड़ने की योजना है। इस योजना में जन्म से बच्चियों की 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक सात चरणों में 40 हजार रुपये की आर्थिक सहायता की जाती है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में 2.58 लाभुकों को जोड़ा जा रहा है।  मुख्यमंत्री लक्ष्मी लाड़ली योजना के तहत अब तक के सभी लाभुकों को सितंबर माह में प्रखंड स्तर पर कैंप लगाकर एनएससी प्रमाण पत्र का वितरण करने का निदेश मुख्यमंत्री ने दिया। उन्होंने कहा कि इसके लाभुको का अगस्त तक इनके डिजिटाइजेशन का काम पहले पूरा कर लें।


बैठक में विभाग की मंत्री डॉ लुईस मरांडी, मुख्य सचिव डॉ डी के तिवारी, अपर मुख्य सचिव सह विकास आयुक्त सुखदेव सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ सुनील कुमार वर्णवाल, सचिव अमिताभ कौशल, पोषण मिशन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डी के सक्सेना सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।


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