12 जुलाई 2019 (शुक्रवार) को देवशयनी एकादशी है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन विशेष महत्त्वपूर्ण  होता है। इस सम्बन्ध में अन्तर राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त ज्योतिष योग शोध केन्द्र, बिहार के संस्थापक दैवज्ञ पंo आरo केo चौधरी उर्फ बाबा-भागलपुर भविष्यवेता एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ  ने सुगमतापूर्वक बतलाया कि:- पुराणों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। जिस कारण सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने का खास महत्व होता है। माना जाता है कि एकादशी को व्रत रखने से व्यक्ति के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार देवशयानी एकादशी हर साल जुन या जुलाई महीने में आती है। इस बार यह एकादशी 12 जुलाई 2019 (शुक्रवार) को है। वहीं पिछले वर्ष यह 23 जुलाई को थी।  देवशयानी एकादशी को आषाढ़ी एकादशी, पदमा एकादशी और हरिशयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। भक्तजन/श्रद्धालु   इस दिन सुबह जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई करते हैं, स्नान के बाद घर में गंगा जल का छिड़काव किया जाता है, पूजा-पाठ वाले स्थान पर भगवान विष्णु की सोने, चांदी, तांबे या पीपल की मूर्ति की स्थापना की जाती है और इसका  विधि के साथ पूजन करते हैं और उपवास रखते है तथा व्रत कथा को सुनते हैं। वामन पुराण के मुताबिक असुरों के राजा कहे जाने वाले बलि ने जब अपने बल और पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार जमा लिया था तब इंद्र देवता घबराकर भगवान विष्‍णु के पास मदद मांगने पहुंचे थे। भगवान विष्‍णु ने देवताओं की मदद करने के लिए वामन अवतार धारण किया था। भगवान विष्णु वामन अवतार में राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुंचे और बलि से तीन पग भूमि मांगी। पहले और दूसरे पग में भगवान ने धरती और आकाश को नाप लिया। अब तीसरा पग रखने के लिए कुछ बचा नहीं थी तो राजा बलि ने कहा कि तीसरा पग उनके सिर पर रख दें। विष्णु भगवान ने तीसरा पग राजा बलि के ऊपर रखा और देवताओं की समस्याओं का निवारण कर दिया। इसी के साथ विष्णु राजा बलि के दान-धर्म से बहुत प्रसन्‍न हुए और उन्‍होंने राजा बलि से वरदान मांगने को कहा। बलि ने उनसे पाताल में बसने का वर मांगा और इस तरह बलि की इच्‍छा पूर्ति के लिए भगवान को पाताल जाना पड़ा। भगवान विष्‍णु के पाताल जाने के बाद सभी देवतागण और माता लक्ष्‍मी परेशान हो गए। तब अपने पति भगवान विष्‍णु को वापस लाने के लिए माता लक्ष्‍मी गरीब स्‍त्री बनकर राजा बलि के पास पहुंची और उन्‍हें अपना भाई बनाकर राखी बांध दी और बदले में भगवान विष्‍णु को पाताल लोक से वापस ले जाने का वचन ले लिया।

देवशयनी एकादशी व्रत का पारण श्रद्धालु/भक्तजन 13 जुलाई 2019 (शनिवार) को सूर्योदय के बाद करेंगे।


Share To:

Post A Comment: