पटना, (रिर्पोटर) : विगत 30 जून को भाकपा-माले की एक उच्चस्तरीय जांच टीम मुंगेर पहुंची और सिवान में कार्यरत आरक्षी स्नेहा हत्याकांड मामले में स्नेहा के परिजनों व स्थानीय लोगों से बातचीत की. माले जांच टीम ने स्नेहा को न्याय दिलाने के सवाल पर चल रहे आंदोलन का भी समर्थन किया और अनशनकारियों के साथ अपनी एकजुटता जाहिर की. इस जांच टीम में भाकपा-माले विधायक सत्यदेव राम, राज्य कमिटी के सदस्य उमेश सिंह व ऐपवा की राज्य कार्यकारिणी सदस्य  संगीता सिंह तथा पार्टी के स्थानीय नेता काॅ. दशरथ सिंह, विनय प्रसाद सिंह, सतीश प्रसाद सिंह, बीडी राम आदि शामिल थे. माले जांच टीम ने आज पटना में संवाददाता सम्मेलन के जरिए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे जांच दल के लौटने के आधे घंटे बाद ही मुंगेर जिला प्रशासन ने आंदोलनकारियों पर बल प्रयोग करते हुए उनके अनशन को समाप्त करवाया. मंुगेर जिलाधिकारी व आरक्षी अधीक्षक के नेतृत्व में सैंकड़ों पुलिसकर्मी अनशन स्थल पर आ धमके ओर अनशनकारियों को आंदोलन खत्म करने के लिए बाध्य कर दिया. भाकपा-माले, भाजपा-जदयू शासन में पुलिस के लगतार बढ़ते मनोबल और राज्य में पुलिस राज स्थापित करने के प्रयासों की कड़ी निंदा करती है.

जांच टीम के सदस्यों ने कहा कि हमें पूरी आशंका है कि चूंकि स्नेहा का मामला पुलिस विभाग से जुड़ा है और उसके यौन उत्पीड़न व हत्या मामले में पुलिस के उच्च अधिकारियों का हाथ बताया जा रहा है, इसलिए प्रशासन इस मामले को किसी भी कीमत पर दबा देने की कोशिश में लगा है. यह बेहद दुर्भाग्यूपूर्ण है पुलिस जैसे सरकारी महकमे में भी महिलायें सुरक्षित नहीं हैं और उनका पुलिस के अधिकारियों द्वारा यौन शोषण हो रहा है.


इसके पहले पटना पुलिस लाइन्स में भी यौन शोषण व उच्च अधिकारियों की दादागिरी के खिलाफ महिला आरक्षियों का आक्रोश फूटा था. लेकिन दुर्भाग्य यह है कि महिला सशक्तीकरण का दावा करने वाली नीतीश सरकार ने इस मामले में दोषी पुलिस के उच्च अधिकारियों पर कार्रवाई करने की बजाए महिला आरक्षियों को ही बर्खास्त करने का फरमान जारी किया. इस मामले में भी हमारी जांच टीम को पता चला कि जब मुख्यमंत्री मुंगेर गए थे, तब आंदोलनकारियों ने अपना ज्ञापन उन्हें सौंपना चाहा था लेकिन मुख्यमंत्री ने ज्ञापन लेने से इंकार कर दिया. भाजपा-जदयू का यही असली चरित्र है.


पुलिस के उच्च अधिकारी हैं शक के घेरे में : सिवान में तैनात आरक्षी (महिला) स्नेहा कांड के संबंध में जो घटनाक्रम उभरकर सामने आया है उससे प्रतीत होता है कि स्नेहा का लंबे समय से यौन शोषण किया जा रहा था और फिर उसकी हत्या कर दी गई. मामले को रफा-दफा करने के लिए उसके लाश को भी गायब कर दिया गया. इसमें पुलिस के उच्च अधिकारी तक शामिल हैं. जांच दल को स्थानीय लोगों ने इस कांड में सिवान के एसपी नवीनचंद्र झा की संलिप्ता की ओर इशारा किया. इस कांड की सीबीआई जांच की मांग उठी तो आनन-फानन में सीआईडी जांच बैठा दिया गया. जाहिर है कि सिवान पुलिस को क्लिन चिट दिया जाना उच्च अधिकारियों को बचाने की कवायद है. यदि मामले की सही से जांच हो तो सिवान पुलिस के उच्च अधिकारी की सहभागिता स्पष्ट हो जाएगी.


स्नेहा की बड़ी बहन ने जांच दल को बताया कि 27 मई को उनकी स्नेहा से बात हुई थी और वह कुशल-मंगल थी. अकस्मात 29 मई को विवेकानंद मंडल को स्थानीय चैकीदार के माध्यम से पता चला कि उनकी बेटी की तबीयत खराब है. वे अतिपिछड़ी धानुक समुदाय के एक बेहद गरीब परिवार से संबंध रखते हैंै. वे 30 मई को अपनी बेटी को देखने सिवान पहुंचे लेकिन उन्हें अपनी बेटी से मिलने नहीं दिया गया. कहा गया कि हाॅस्पीटल में भरती है. सिवान पुलिस इधर-उधर की बात करते रही. फिर बताया गया कि उनकी बेटी की मौत हो गई. उसके बाद भी बेटी की लाश विवेकानंद मंडल को नहीं दिखलाया गया. सिवान के डाॅक्टरों ने पोस्टमार्टम से इंकार कर दिया क्योंकि उन्हें पोस्टमार्टम के लिए स्नेहा की लाश देने बजाए 20-25 दिन पुरानी सड़ी-गली लाश दी गई थी. इससे बौखलाए पुलिस-प्रशासन ने सिवान के डाॅक्टरों से मारपीट किया जिसके कारण डाॅक्टर हड़ताल पर चले गए. तदुपरांत उस सड़ी हुई लाश को पटना पीएमसीएच लाया गया और 1 जून पोस्टमार्टम कराकर विवेकानंद मंडल को लाश लेने के लिए मजबूर किया गया लेकिन उन्होंने लाश स्वीकार नहीं की. उन्होंने कहा कि 27 मई तक हमारी बेटी सकुशल थी, दो ही दिन में उसकी लाश इतनी सड़ कैसे जाएगी? यह मेरी बेटी की लाश नहीं है. जब लाश लेने से परिजनों ने इंकार कर दिया तब मंुगेर एसपी गौरव मंगला और एसडीओ खगेशचंद झा के द्वारा नवागढ़ी के लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजने की धमकी दी गई. पुलिस प्रशासन ने अपनी मौजूदगी में आधी रात को उस लाश का अंतिम संस्कार करवाया.


इसके खिलाफ 2 जून को आक्रोशित समुदाय ने सड़क जाम किया तो प्रशासन ने सबके उपर मुकदमा दायर कर दिया गया. इस बर्बर घटना के खिलाफ मुंगेर में 24 जून से धरना व 25 जून से धारावाहिक अनशन का कार्यक्रम चल रहा था. स्नेहा के पिता विवेकांनद की हालत बेहद खराब हो चुकी है और वे फिलहाल आईसीयू में भर्ती हैं.

भाकपा-माले इस पूरे मामले की तत्काल सीबीआई जांच की मांग करती है. इसके खिलाफ 6 जुलाई को राज्यव्यापी प्रतिवाद किया जाएगा ।


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