पटना, (रिर्पोटर) :अटल जी के सपनों का कश्मीर’ विषयक व्याख्यान में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने अटल जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 और 35 ए को हटाने की हिम्मत कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने न केवल पंडित नेहरू के 70 वर्ष पूर्व की गलतियों को सुधारा बल्कि भारत और कश्मीर के बीच की दीवार को ढाह कर श्यामा प्रसाद मुखर्जी और अटल बिहारी वाजयेयी के सपनों को भी पूरा किया है। सरकार की इस ऐतिहासिक व साहसिक निर्णय के कारण बसपा, अन्ना द्रमुक सहित दर्जन भर पार्टियों को जनभावना को देखते हुए अपना स्टैंड बदलना पड़ा। व्याख्यान का आयोजन प्रज्ञा प्रवाह से सम्बद्ध संस्था चिति और कबीर के लोग के संयुक्त तत्वावधान में बीआईए के सभागार में किया गया था।

श्री मोदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों की नजरबंदी पर सवाल उठाने वालों को बताना चाहिए कि शेख अब्दुला को 11 वर्षों तक कांग्रेस की सरकार ने जेल में क्यों बंद रखा? 10 वर्षों तक कश्मीर में इंटरनेट क्यों नहीं जाने दिया? कांग्रेस की सरकार को धारा 144 की सरकार क्यों कही जाती थी? सुप्रीम कोर्ट तक जाने वाले मानवाधिकारवादी तब कहां थे? 

अनुच्छेद 370 और 35 ए के खात्मे के बाद अब भारतीय संसद से पारित सभी कानून पूरे देश के साथ कश्मीर में भी लागू होगा। अब कश्मीर में कोई दोयम दर्जे का नागरिक नहीं होगा। वहां के आदिवासियों व पिछड़ों को भी आरक्षण का लाभ मिलेगा। गैर कश्मीरियों से शादी करने वाली कश्मीरी लड़कियों की संतानों को भी सम्पत्ति का अधिकार मिलेगा।

1948 में कश्मीर पर कबायलियों के हमले के बाद सेना की मदद पहुंचाने में देरी, कश्मीर में जनमत संग्रह कराने का निर्णय, कश्मीर के मामले को लार्ड माउंट बेटन के सुझाव पर संयुक्त राष्ट्र संघ में ले जाना, युद्धविराम की घोषणा कर भारतीय सेना के विजय अभियान को रोकना और अनुच्छेद 370 का अस्थायी प्रावधान बिना संविधान संशोधन संविधान में शामिल कराना पंडित नेहरू की ऐसी गलतियां थीं जिसे सुधारने की पहल 05 अगस्त, 2019 को की गई। 1960 में ही कश्मीर पर कांग्रेस सरकार की नीतियों को अटल जी ने ‘भयंकर भूलों की लम्बी कहानी’ बताया था।

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