भागलपुर, (रिर्पोटर) : रक्षाबंधन एक ऐसा त्योहार है, जिसका इंतजार हर भाई-बहन को बहुत ही बेसब्री से होता है। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन का पर्व होता है। इस खास दिन पर बहन भाई के कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उसके लंबी उम्र की कामना करती है। और भाई बहन को वचन देता है कि वह उसकी ताउम्र रक्षा करेगा। इस पर्व को अधिकांश धर्म के लोग पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। इस सम्बन्ध में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त ज्योतिष योग शोध केन्द्र, बिहार के संस्थापक दैवज्ञ पंo आरo केo चौधरी उर्फ बाबा-भागलपुर, भविष्यवेत्ता एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ ने सुगमतापूर्वक बतलाया कि:- रक्षाबंधन का त्योहार इस बार 15 अगस्त 2019 (गुरुवार) को मनाया जाएगा। सावन के महीने में बहुत ही लंबे समय के बाद 15 अगस्त के दिन चंद्र प्रधान श्रवण नक्षत्र में स्वतंत्रता दिवस और रक्षा बंधन का संयोग बना है। रक्षा बंधन पर इस बार राखी बांधने का काफी लंबा मूहर्त है। सुबह 5 बजकर 49 मिनट से लेकर शाम के 6 बजकर एक मिनट तक का शुभ मूहर्त है। सिर्फ 1:30 से 3.00 बजे के अवधि को छोड़कर। क्योंकि इस समय राहु काल होगा। राहु काल में शुभ कार्य वर्जित है।
एक बार भगवान कृष्ण ने राजा शिशुपाल को मारा था। इस दौरान कृष्ण के बाएँ हाथ की ऊंगली से खून बहने लगे। इसे देखकर द्रौपदी बहुत ही दुखी हो गईं और उन्होंने अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड़कर कृष्ण की ऊंगली में बाँध दिया, जिससे खून बहना बंद हो गया। तभी से कृष्ण ने द्रौपदी को अपनी बहन स्वीकार कर लिया था। सालों बाद जब पांडव द्रौपदी को जुए में हार गए थे और भरी सभा में उनका चीरहरण हो रहा था तब भगवान कृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाई थी। उसी समय से रक्षाबंधन की शुरुआत हुई है। ऐसी मान्यता है।

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