पटना, (रिर्पोटर) : जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि साल 2005 में जब हमारी सरकार बनी थी, तो उस समय 12.5 प्रतिशत बच्चे स्कूल से बाहर थे। अब यह घटकर एक प्रतिशत से भी कम रह गया है। करीब सभी बच्चे स्कूल जाने लगे हैं। 5वीं कक्षा के बाद गरीबी के कारण अभिभावक अपनी बच्चियों को पढ़ने के लिए स्कूल नहीं भेज पाते थे। गरीबी के कारण बच्चियों को जरूरी कपड़े और अवसर नहीं मिल पाते थे। हमारी सरकार ने इसके लिए मिडिल स्कूल पोशाक योजना चलाई, जिसमें लड़कियों को दो जोड़ी कपड़े, एक जोड़ी जूती और एक बैग उपलब्ध कराया जाता है।

श्री प्रसाद ने कहा कि 8वीं कक्षा से आगे बालिकाओं को पढ़ने के लिए ‘बालिका साइकिल योजना’ चलाई गई। इससे लड़कियां झुंड में साइकिल से स्कूल जाने लगीं। इससे सामाजिक सोच में बदलाव आया। स्कूल जाने वाली लड़कियों की संख्या बढ़ी। यह नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। लड़कियों का आत्मविश्वास बढ़ा। इसके बाद लड़कों के लिए भी साइकिल योजना चलाई गई।

उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के मुताबिक, बिहार में महिलाओं के बीच साक्षरता की दर सिर्फ 51 फीसदी है. इसका मतलब है कि उस समय प्रदेश की करीब आधी महिलाएं पढ़ी-लिखी नहीं थीं। इस समस्या को देखते हुए हमारी सरकार ने श्मुख्यमंत्री बालिका प्रोत्साहन योजनाश् चलाई। इसके तहत 10वीं की परीक्षा फर्स्ट डिवीजन से पास करने वाली लड़कियों को राज्य सरकार आर्थिक सहायता देती है। सरकार की तरफ से छात्रा को 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है और यह रकम सीधे छात्रा के बैंक खाते में डाल दी जाती है। ‘मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना’ के तहत इंटर पास करने वाली अविवाहित लड़कियों को 10 हजार और ग्रेजुएट पास लड़कियों को 25 हजार रुपये हमारी सरकार द्वारा दी जाती है. मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी लडकियों के सशक्तिकरण और समग्र विकास को कृत संकल्पित हैं।

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