पटना, (रिर्पोटर) : राजद पर हमला बोलते हुए भाजपा प्रवक्ता सह पूर्व विधायक राजीव रंजन ने कहा “ कभी बिहार पर एकछत्र राज करने वाली राजद को आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़नी पड़ रही है. ठोस नेतृत्व के अभाव में आज इनकी पूरी की पूरी पार्टी कंफ्यूजन का शिकार बन के रह गयी है. इन्हें समझ ही नही आ रहा कि आखिर करें तो करें क्या? दरअसल कांग्रेस की तर्ज पर लालू जी ने राजद को अपनी पॉकेट पार्टी बनाने का जो दाँव खेला था, वह उन्ही पर उल्टा पड़ गया है. कांग्रेस की तरह ही आज राजद भी अपने युवराजों की नाकामी की बदौलत धीरे-धीरे गर्त में जा रही है और पार्टी के सभी पुराने सिपहसालार इसे नष्ट होते देखने को मजबूर हैं. उन्हें पता है कि कुछ बोलने पर सीधे-सीधे पार्टी से निकाल दिए जायेंगे. इसी डर के वजह से जो नेता आज राजद को सही राह पर ला सकते हैं, उन्होंने अपने मुंह पर ताले जड़ लिए हैं. दूसरी तरफ इनके शीर्ष नेता भी एक तरह से ज़िद पर अड़े हैं कि पार्टी डूबे तो डूबे लेकिन अध्यक्ष पद परिवार के हाथ से नही जाना चाहिए. इन्ही कारणों से लोकसभा चुनावों के बाद इनकी स्थिति त्रिशंकु के समान हो गयी है, जो न आगे बढ़ पा रहे हैं और न पीछे लौट सकते हैं.”

  

श्री रंजन ने कहा “ लोकसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद लोगों को लगा था कि शायद अब राजद आत्मचिंतन करे और अपनी राजनीति में कोई परिवर्तन लाए, लेकिन इसके ठीक उलट इनके नेता राहुल जी की ही तरह अज्ञातवास पर निकल गये. राहुल जी की ही तरह बीते तीन महीनों में इनकी राजनीति जमीन के बजाए ट्विटर पर चलती रही है. आज इनके नेता भी जनभावनाओं के विपरीत जा कर बयानबाजी करने के लिए प्रसिद्धि पा चुके हैं और अब लगता है कि कांग्रेस की ही तर्ज पर राजद के युवराज भी अपनी पार्टी का बंटाधार कर के ही मानेंगे. राजद के अन्य नेता यह जान लें कि उनके लिए यह फैसले की घड़ी है, उन्हें यह तय करना होगा कि उन्हें परिवार के पीछे लगे रहना है कि पार्टी को आगे बढ़ाना है. वह यह समझ लें कि राजद का भविष्य अब उनके ऊपर टिका हुआ है और जल्द ही उन्होंने कोई निर्णय नही लिया तो राजद को समाप्त होने से कोई नही बचा सकता।




Share To:

Post A Comment: