रांची, (रिर्पोटर) :   सेंट जेवियर्स स्कूल के सभागार में पंडित राजकुमार शुक्ल फाउंडेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में महात्मा गांधी जी के 150 जन्मशती वर्ष एंव नील आंदोलन के जनक और चंपारण के गांधी नाम से प्रसिद्ध पंडित राजकुमार शुक्ल जी के 144 वें जन्मदिन के अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आये जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में रांची झारखंड की पावन भूमि पर शिक्षा जगत को समर्पित अनेक बुद्धिजीवीयों, प्राचार्यों और शिक्षाविदों ने आपने बिचार रखे। पंडित राजकुमार शुक्ल फाउंडेशन के अध्यक्ष  अजय राय जी ने अपने स्वागत भाषण से इस सम्पूर्ण कार्यक्रम का शुभारंभ तथा मंच संचालन किया।

इस अवसर पर झारखंड विधानसभा के संयुक्त सचिव मिथिलेश मिश्रा जी ने अपने उदबोधन में   पंडित राजकुमार शुक्ल जी द्वारा किये गए सामाजिक उत्थान के प्रयासों का विस्तार पूर्वक उल्लेख करते हुए बताया कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में इन महानुभावों ने किस प्रकार अपना विलक्षण योगदान दिया और एक निश्चित हिस्से में अनावश्यक रूप से किसानों द्वारा नील की खेती किये जाने वाले अंग्रेजों के आदेशों को महात्मा गांधी जी के सत्याग्रह की नींव डलवाने में योगदान देते हुए उन किसान विरोधी आदेशों को परिवर्तित कराया था इस जनांदोलन को सफल बनाने के लिए पंडित राजकुमार शुक्ल  ने  अपनी जमीन जायजाद और सारी संपत्ति तक को बेच डाला था। इसके अलावा  मिथिलेश मिश्र जी ने इन दोनों स्वतंत्रता सेनानियों के अलावा भी देश की आजादी में अपनी शहादत देने वाले अनेक गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को भी याद किये जाने का आवाहन किया। वहीं  सेंट थॉमस स्कूल के प्राचार्य  शिबू अब्राहम मैथ्यू  ने ने कहा कि इन दोनों स्वाधीनता सेनानियों से किस प्रकार हम प्रेरणा लेकर अपनी जीवन यात्रा का मार्गदर्शन कर सकते हैं।

वहीं  राम सिंह जी प्राचार्य डी पी एस स्कूल रांची जी ने अपने विचारों से सभा को संबोधित करते हुए कहा कि बहुत कम लोग जानते है कि यह अंग्रेजी हुकूमत की पहली पराजय चंपारण में हुईं । 135 वर्ष के कानून को उसे संशोधन करना पड़ा फिर बाद में बंद करना पडा । यही नहीं महात्मा गांधी जी का भी महात्मा नाम यही पडा । इस महान पुरुष की त्याग , बलिदान , देश के प्रति प्रेम यदि विस्तृत रूप में जानना हो तो अवश्य स्व राय प्रभाकर प्रसाद द्वारा लिखित उनकी संघर्ष की कहानी अवश्य पढें । कैसे वे दिसंबर 1916 में कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में बिहार के किसानों का प्रतिनिधित्व किये और कम पढें लिखे होने के बावजूद किसान के समस्याओं और खास चंपारण के समस्या पर सबका ध्यान आकर्षित किया । किस प्रकार महात्मा गांधी को चंपारण की समस्या से अवगत करा कर उनसे चंपारण आने के लिए आग्रह किया । कुछ दिन टालने के बाद महात्मा गांधी को भी इनके घोर परिश्रम , पुनीत आग्रह और जिद के सामने झुकना पडा और अंतत: 10 अप्रैल 1917 को पुन: कोलकता जाकर उन्हे पटना और मुजफ्फरपुर के रास्ते मोतिहारी आने और वहां के किसानों की दुर्दशा का रूबरू करा ही दिया ।


वहीं  फादर अजित खेस प्राचार्य सेंट जेवियर्स स्कूल डोरंडा  ने अपना अध्यक्षीय संबोधन में अतिथियों का अभिनंदन करते हुए उपस्थित छात्रों का मार्गदर्शन किया।

इस अवसर पर के सुब्रमनियमएएन वेंकटेशन, एस रामन्ने, सोमेन सिंह चौधरी, एस संगोटीयन, फादर मोहिदीन, सुनील नागर,मुकेश साहू,विजय सिंह, अमित कश्यप गौरव कुमार सहित सैकड़ो लोगों ने कार्यक्रम में भाग लिया ।

सभा का समापन आईसीएल के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष शशिकान्त शर्मा के समापन भाषण और धन्यवाद के द्वारा किया गया।


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