पटना, (रिर्पोटर) : आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति पर आधारित औषधि की सही मात्रा मॉनसून के रोगाणुओं से लडऩे में मददगार साबित होगी। ऋतु संधी के समय कम भोजन लेने से रोगों में 50 प्रतिशत की कमी आती है। गार्गी ग्रांड होटल में आयुर्वेदिक पद्धति से बना डाबर का च्यवनप्राश की जानकारी देते हुए सरगंगाराम हॉस्पीटल दिल्ली के वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक परमेश्वर अरोड़ा ने कहा कि भारतीय जड़ी-बूटियां और आयुर्वेद मे दिये गये सूत्र हमारी जीवन शैली को स् वस्थ्य एवं ऊर्जावान बनाती है। च्यवनप्राश प्रसिद्ध आयुर्वेद सूत्र है जिसका इस्तेमाल कई दशकों से रोग के प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने एवं संक्रमण से सुरक्षा प्रदान के लिए है। इसका उपयोग सभी ऋतु में किया जा सकता है। यह अग्निमांद को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि ऋतुसंधि के समय सही आहार लेने पर पोषण प्राप्त होता है। तेल वायुरोधक क्षमता है। इसका इस्तेमाल खाने एवं शरीर पर मालिश करने से पेन-किलर का काम करता है। आयुर्वेद पद्धति से रोगों का इलाज होने पर पूरे विश्व में योग की तरह भारत का नाम एक बार फिर विश्व में होगा।


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