पटना, (रिर्पोटर) : पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के शिव चर्चा करा वोटे बटोरने वाले बयान को स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कुंठा से ग्रसित बताया है। श्री पांडेय ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अब गुजरे जमाने के सितारे हो चुके हैं। उन्हें कोई पूछने वाला नहीं है। यहां तक की महागठबंधन में उन्हंे दरकिनार कर दिया गया है, इसलिए मीडिया में बने रहने के लिए इस तरह की फिजूल बातें कर राज्य की जनता को गुमराह कर रहे हैं।    

         श्री पांडेय ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री को भी राज्य की जनता ने नेतृत्व का मौका दिया, तब उन्हें पिछड़ा और अतिपिछड़ा का ध्यान नहीं रहा, अब जब एनडीए की सरकार ऐसे वर्गों को मुख्यधारा में लाकर उन्हें सत्ता में भागीदार बना रही है तो उन्हें पेट में मरोड़ा दे रहा है। वे बताएं कि अपने मुख्यमंत्रीत्वकाल में उन्होंने ऐसे वर्गों के लिए कौन सी योजना बनाई या फिर चलाई, जिससे उनके दिन सुधर सकें। कहा कि केंद्र और राज्य की एनडीए सरकार भेद-भाव की राजनीति नहीं बल्कि सबके विकास के लिए संकल्पित है। भाजपा के शासन में शिव चर्चा के साथ विकास की गंगा भी बह रही है। जिसका जीता जागता उदाहरण है कि जनता ने महागठबंधन को 1 सीट जबकि एनडीए को 39 सीट पर विजय बनाया है।

      श्री पांडेय ने उन्हें याद दिलाते हुए कहा कि जिस व्यक्ति ने उनको आगे बढ़ाने का काम किया, उनको भी धोखा देने से बाज नहीं आए। यही नहीं भाजपा के साथ भी उन्होंने विश्वासघात करने का काम किया। अपने बेटे को एमएलसी बनाने के चक्कर में उन्हांेने इस गठबंधन से उस गठबंधन में छलांग लगाई। दरअसल सत्ता लोलुपता ही उनकी विचारधारा है। अवसरवादिता की हद तो उन्होंने तब कर दी जब लालू जी के बेटे के नेतृत्व को अस्विकार कर अपने बेटे को मुख्यमंत्री के लिए प्रोजेक्ट करने लगे। कहा कि मांझी जी आपकी राजनीतिक दुकान में कुंडा तो 2019 के लोस में चुनाव मंे ही लग गया। अब विधान सभा चुनाव में उस कुंडे में जनता 7 लीवर का ताला लगाने वाली है।


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