कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। इसी तिथि को भगवान धन्वंतरि का अवतरण हुआ था। इस सम्बन्ध में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त ज्योतिष योग शोध केन्द्र, बिहार के संस्थापक दैवज्ञ पंo आरo केo चौधरी उर्फ बाबा-भागलपुर, भविष्यवेत्ता एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ ने सुगमतापूर्वक बतलाया कि:- धनतेरस के दिन घर और व्यवसायिक स्थल की अच्छी तरह सफाई करके संध्या काल में दीप प्रज्वलित कर विशेष रुप से श्रीगणेश, धनाध्यक्ष श्रीकुबेर और धन की देवी माता महालक्ष्मी की पूजा-अर्चना सुख-समृद्धि तथा प्रेम-वैभव की कामना से की जाती है। शास्त्रोक्त मान्यता है कि ऐसा करने से माता महालक्ष्मी प्रसन्न होती है और कामना पूर्ण करती है। इसलिए धनतेरस के अवसर पर महालक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष धनतेरस 25 अक्टूबर 2019 (शुक्रवार) को मनाया जाएगा। यह पूजा स्थानीय समय सारणी के अनुसार स्थिर लग्न में करना चाहिए। विशेषकर वृषभ व सिंह लग्न में।  वृश्चिक व कुम्भ ये दोनों भी स्थिर लग्न है लेकिन इस लग्न में माता महालक्ष्मी की पूजन नहीं करना चाहिए। धनतेरस के दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार किसी भी रूप में चाँदी व अन्य धातु की मूर्ति और सामग्री खरीदना विशेष शुभ माना जाता है। समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन ही भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर अवतरित हुए थे। भगवान धन्वंतरि विष्णु जी के अवतार हैं। संसार में चिकित्सा विज्ञान के विस्तार और प्रसार के लिए ही भगवान विष्णु जी ने धन्वंतरि के रूप में अवतार लिये  थे। इसलिए भगवान धनवंतरि की पूजा-अर्चना भी इस दिन की जाती है। आमजन इस दिन कुछ ना कुछ खरीदते हैं। जैसे:-  बर्तन, धातु के सिक्के इत्यादि। विशेषकर व्यवसाई अपने प्रतिष्ठानों को साफ-सफाई कर पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन बिक्री भी अच्छी-खासी होती है।  साधक/उपासक इस दिन किसी ना किसी रूप में माता महालक्ष्मी को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं और उनकी कृपा बनी रहे इसके लिए प्रार्थना करते हैं।

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