असत्य पर सत्य की विजय का पर्व दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या के दिन भारत सहित कई देशों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस सम्बन्ध में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त ज्योतिष योग शोध केन्द्र, बिहार के संस्थापक दैवज्ञ पंo आरo केo चौधरी उर्फ बाबा-भागलपुर,भविष्यवेत्ता एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ ने सुगमतापूर्वक बतलाया कि:- तिथि विशेष के अनुसार इस वर्ष दीपावली 27 अक्टूबर 2019 (रविवार) को मनाया जाएगा। यह पर्व अध्यात्मिक रूप से अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है। संपूर्ण भारत में मनाएँ जाने वाले सभी त्योहारों में दीपावली को सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक महत्व है। तमसो मा ज्योतिर्गमय अर्थात् अंधेरे से प्रकाश की ओर जाइए। यह उपनिषदों की आज्ञा है। यह सनातनी पर्व है। इसे सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के जन सामान्य भी मानते हैं। मान्यता है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा श्री रामचंद्र जी अपने 14 वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे।

श्री राम के स्वागत में अयोध्या वासियों ने घी के दिए जलाए। जो परम्परागत रूप से कायम है। यह स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है। सप्ताह पूर्व से ही दीपावली की तैयारियाँ शुरू हो जाती है। जनसामान्य अपने घरों और प्रतिष्ठानों आदि की साफ-सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं। दीपावली भारत, नेपाल, श्रीलंका, मॉरीशस, सूरीनाम, फिजी, सिंगापुर, पाकिस्तान, मलेशिया और ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में भी मनाया जाता है। दीपावली को विभिन्न ऐतिहासिक घटनाओं, कहानियों या मिथको को चिन्हित करने के लिए सनातनी द्वारा मनाई जाती है। लेकिन यह बुराई से अच्छाई, अंधकार से प्रकाश की ओर, अज्ञान से ज्ञान की ओर को दर्शाता है। शास्त्रोंक्त मान्यतानुसार इस दिन माता महालक्ष्मी रात्रि में पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जो भक्त रात्रि जागरण कर उनकी भक्ति करते हैं उनके यहाँ माता महालक्ष्मी स्थाई रूप से निवास करती है। इस दिन श्री गणेश जी, रिद्धि-सिद्धि व महालक्ष्मी के पूजन से घर-परिवार में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। दीपावली के दिन घर के मुख्य द्वार पर कुमकुम से स्वस्तिक तथा रंगोली बनाने का शास्त्रोक्त नियम है। इस नियम का पालन करने से माता महालक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। एक दिन पूर्व यानी कि नरक चतुर्दशी के रात्रि से साधक/ उपासक माता काली की पूजा व आराधना करते हैं तथा इस दिन माता लक्ष्मी की भी विशेष रूप से पूजा-अर्चना करते हैं। इस तरह कुछ दिन पूर्व से ही भक्तजन श्रद्धा भक्ति के भाव में डूबते हैं जो सिलसिला छठ पूजा तक अनवरत चलता रहता है। दीपावली की निशिथ बेला में तांत्रिकों द्वारा कुछ विशेष तंत्रोक्त क्रिया और कुछ विशेष टोटके मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है। दीपावली की रात्रि तांत्रिकों का महापर्व काल के नाम  से जाना जाता है।

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