देवाधिदेव महादेव  की कई ऐसी तस्वीरें और मूर्तियाँ हमलोग देखते हैं जिसमें वे माँ काली के पैरों के नीचे लेटे हुए हैं। शास्त्रोंशास्त्रोंक्त मान्यता है कि महादेव ही एकमात्र ऐसे देव हैं जो आदि और अनंत हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि महाकाली के क्रोध को शांत करने के लिए आखिर स्वयं भगवान शिव को महाकाली के पैरों के नीचे क्यों आना पड़ा? इस सम्बन्ध में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त ज्योतिष योग शोध केन्द्र, बिहार के संस्थापक दैवज्ञ पंo आरo केo चौधरी उर्फ  बाबा-भागलपुर, भविष्यवेत्ता एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ ने शास्त्रोंक्त मतानुसार बतलाया कि:- एक बार रक्तबीज नामक दैत्य ने कठोर तपस्या की, जिसके बाद उसे वरदान मिला कि उसके शरीर से खून की एक भी बूंद जब धरती पर गिरेगी तो उससे सैकड़ों दैत्य बन जाएंगे। रक्तबीज इस शक्ति के बल पर निर्दोषों को परेशान करना शुरू कर दिया। परिणाम स्वरूप तीनों लोकों पर उसका आतंक मच गया। इतना ही नहीं, रक्तबीज देवताओं को भी ललकारने लगा। जिसके बाद देवताओं और दानवों के बीच भयंकर युद्ध हुई। देवताओं ने दानवों को हराने के लिए पूरी शक्ति लगा दी। रक्तबीज के शरीर से खून की एक बूंद जमीन पर गिरती तो देखते ही देखते सैकड़ों दैत्य पैदा हो जाते थे। ऐसे में रक्तबीज को हराना लगभग नामुमकिन हो गया था। देवता लोग इस परेशानी को सुलझाने के लिए माँ काली की शरण में गए। काली माँ  ने राक्षसों का वध करना शुरू कर दिया, लेकिन माँ काली जब भी रक्तबीज के शरीर पर वार करती तो उसके खून से और भी राक्षस उत्पन्न हो जाते, इसकेलिए माँ काली ने अपनी जीभ को बड़ा कर लिया। जिसके बाद रक्तबीज का रक्त जमीन पर गिरने की बजाय माता काली की जीभ पर गिरने लगी। क्रोध से उनके ओंठ फड़कने लगे और आंखें बड़ी-बड़ी हो गई। महाकाली के विकराल रूप को देखकर सभी देवता परेशान हो गए, क्योंकि उन्हें शान्त करना किसी के बस की बात नहीं थी। दानवों की लाशें बिछने लगी। माँ को शांत करने के लिए सभी देवता महादेव की शरण में पहुँच गए। भगवान शिव ने मां काली को शांत करने का भरसक प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। शिव जी उनके रास्ते पर लेट गए और जब माता के पैर उन पर पड़ी तो माँ काली चौंक गईं। जिसके बाद उनका गुस्सा बिल्कुल शांत हो गया। भगवान शिव माता महाकाली के पैरों के नीचे का यही रहस्य है। जब जब देवता दानव से युद्ध करने में कमजोर पड़े देवी ने संकट से उबारा इसी क्रम में माता काली का दिव्य एवं दुष्टो के शमन वाली मुद्रा में माता का रूप भक्तों के सामने  आया। माता को शांत करने का जब कोई उपाय नहीं दिखा तो देवाधिदेव महादेव को यह युक्ति लगानी पड़ी और वो माता के चरणों के पास लेट गए।जब माता के चरण उन पर पड़े तो माता का गुस्सा शांत हो गया।

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