मधुबनी, (रिर्पोटर) :सपा नेता राम सुदिष्ट यादव  ने कहा कि आजादी के पूर्व और आजादी के दो दशक बाद तक भारत में सबसे अधिक चीनी उत्पादन हब्ब बिहार था।  देश का प्रथम चीनी मिल मधुबनी जिले के लोहट सुगर मिल स्थापित किया गया।  बिहार में कुल 16 चीनी मिलें थी। देश में बिहार राज्य अकेला लम्बे समय तक चीनी उत्पादन का केन्द्र बना रहा। आज सभी मिलें बंद पड़ा है। उत्तर भारत के किसानों की माली हालत सुधारने के लिए सरकारी चीनी मिलों को पुन: चालू करना आवश्यक है।   वर्ष 1996 में केन्द्रीय सरकार के प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा सरकार द्वारा देश में चीनी लेवी कानून समाप्त कर दिया। जिसका कुप्रभाव उत्तर भारत के चीनी मीलों पर अधिक पड़ा। इस कुप्रभाव के कारण वर्ष 1997-98 से उत्तर भारत के सभी सरकारी चीनी मिलें उत्पादन मूल्य अधिक बढ़ जाने राज्य सरकारों को मिलें बंद बंद करना पड़ा। इस कानून से सबसे अधिक प्रभावित दरभंगा कमिश्नरी के रैयाम, सकरी, लोहट चीनी मिलें सहित बिहार के सभी सरकारी मिलें 97-98 बंद पड़ा है।  
       ज्ञातव्य हो कि चीनी लेवी कानून से उत्पादन मूल्य के आधार पर संतुलन बनाए रखने के लिए उत्तर भारत के चीनी मिलों को कुल चीनी उत्पादन के 40प्रतिशत चीनी लेवी कानून के तहत बेचना पड़ता था और दक्षिण भारत के चीनी मिलों को 60प्रतिशत चीनीलेवी कानून के तहत बेचना पड़ता था। भिन्न भिन्न राज्यों के चीनी उत्पादन मूल्य मौनसून के कारण अलग-अलग रहने से भिन्न भिन्न है। इसलिए सभी राज्यों को संतुलन बनाए रखने के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने यह लेभी चीनी कानून बनाया था।
         इस कानून से उत्तर भारत के चीनी मीलों को सरकारी सहायता प्राप्त होता था। इसलिए देश के सभी चीनी मिलों में चीनी उत्पादन कार्य होता रहता था। जिसका सीधा फायदा उत्तर भारत के चीनी मीलों और किसानों को अधिक मिलता था।

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