पटना, (रिर्पोटर) : पिछले दिन इंडियन जर्नलिस्ट फेडरेशन कार्यक्रम केरल में कोकल में शुभारंभ  हुआ। जहां मुख्य अतिथि के रूप में स्थानीय विधायक आबिद हुसैन, अनिल परेरा श्रीलंका इंटरनेशनल जर्नलिस्ट यूनियन प्रेसिडेंट पदमा श्रीलंका, आईजेएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बिमल थंब, राष्ट्रीय महासचिव जी संताराम, शैलेन्द्र झा, राष्ट्रीय संयोजक आईजेएफ, हर्षगुप्ता राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आईजेएफ, शरनजीत सिंह तेतरी अध्यक्ष छत्तीसगढ़ आईजेएफ, पुरान साहू ओडिसा, शिवनी मिश्रा वेस्ट ब ंगाल, बी. सतनारायण रेड्डी आंध्रप्रदेश, बी. गोपाल आंध्रप्रदेश, अनीश बी लाल, तेलंगाना, मुरली, हक्कीम, महबूब, संदीप केरल आदि ने द्वीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इंडियन जर्नलिस्ट फेडरेशन के नेशनल प्रेसिडेंट बिमल थंब ने स्वागत भाषण दिया। पत्रकारों के विकास के लिए केन्द्र और रज्य सरकार नई नई योजना लागू करे, नेशनल जनरल सेके्रटरी संताराम ने कहा कि सभी पत्रकारों को पूरा सुरक्षा प्रदान करें। देश और विदेश में पत्रकारों को एकजुट करें। विदेशी पत्रकार श्रीलंका से अनिल परेरा ने कहा कि पत्रकारिता की शिक्षा एवं स्कूलों में पत्रकारिता पर कार्यशाला करें। मुख्य अतिथि विधायक आबिद हुसैन ने कहा कि पत्रकारिता एवं सोशल मीडिया आज तेजी से सूचना दे रही है। वहीं सोशल मीडिया को झूठी खबरों से भी बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पत्रकार विकास का एक अंग होता है। पत्रकार के विकास के बिना लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता। पत्रकारों का मीडिया हाउस शोषण करता है उसे बंद करे। केन्द्र और राज्य सरकार पत्रकारों को हर सुविधा लागू करे, जैसे आवास योजना, पत्रकार योजना, स्वास्थ्य बीमा योजना, हवाई जहाज, रेलवे एवं बसों में भी 75 प्रतिशत छूट मिलना चाहिए। आज देखा जाये कि भारत का पत्रकार शहरी क्षेत्रों से लेकर पंचायत स्तर तक उनकी स्थिति ठीक नहीं है। अगर पत्रकार की स्थिति ठीक होगी तभी लोकतंत्र की बुनियाद मजबूत होगी। इसके बिना लोकतंत्र का बुनियाद मजबूत नहीं हो सकता है। आजादी के लड़ाई में पत्रकारों का अहम  भूमिका था अगर आजादी के लड़ाई में समाचार छोटे-मोटे नहीं होते तो हम आजादी की लड़ाई जीत नहीं सकते थे। कलेक्टर से लेकर प्रधान सचिव एवं विभाग को अगर कोई पत्रकार समाचार प्रकाशित करता है तो जनता के भलाई के लिए उस पर एक्शन लेकर सरकार को कार्रवाई करना चाहिए ताकि योजना का लाभ अंतिम पायदान मेंरहने वाले व्यक्जियों को मिल सके। एक जमाना था कि मल्यालम मनोरमा, दी हिन्दू, नवभारत, नवभारत टाईम्स में छोटी-मोटी शिकायत की खबरे छपने के बाद खुद मुख्यमंत्री भी एक्शन में आकर अफसरों पर कार्रवाई करते थे। उसी तरह से लागू होना चाहिए। डिजिटल इंडिया जितना बढ़ जाये, मगर समाचार पत्रों के बिना अब भी सपना अधूरा दिखाई देता है। अगर छात्र-छात्राएं जब तक समाचार पत्र नहीं पढ़ेंगे तब वेआगे नहीं बढ़ेंगे।

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