पटना, (रिर्पोटर) :  ’नशा मुक्ति दिवस’ पर ज्ञानभवन में आयोजित राजकीय समारोह को सम्बोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बिहार में शराबबंदी का निर्णय कोई समान्य निर्णय नहीं था। इसे इतिहास याद रखेगा। सरकार का कदम कभी डगमगाए नहीं,क्योंकि बिहार की जनता साथ है। बिहार सहित देश के पांच राज्यों में शराबबंदी है। बिहार की सफलता को देख कर आंध्र प्रदेश में भी क्रमबद्ध तरीके से शराबबंदी की पहल शुरू की गई है। श्री मोदी ने कहा कि केरल में शराब की सर्वाधिक खपत प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष 8.5 लीटर है। वहां की पूर्ववर्ती सरकार ने शराबबंदी का निर्णय लिया था मगर लेफ्ट की सरकार ने कदम पीछे हटा लिया है। आंध्र प्रदेश की जगमोहन रेड्डी सरकार ने दो वर्षों में क्रमबद्ध तरीके से शराबबंदी के निर्णय के तहत शराब की दुकानों के अधिग्रहण और उनकी संख्या कम करने के साथ बार, रेस्टुरेंट को साल में 1.5 करोड़ से अधिक की शराब की बिक्री पर रोक लगा दिया गया है। बिहार में पंजाब, हरियाणा की तरह शराब पीने की कभी संस्कृति नहीं रही है। आज शराबबंदी का कुछ लोग उपहास जरूर उड़ा रहे हैं, मगर किसी में हिम्मत नहीं है कि वह शराब पी कर सड़कों पर निकले। अगर 5 से 10 वर्ष की और देरी होती तो बिहार में भी शराबबंदी मुश्किल हो जाती। बिहार में जब शराबबंदी लागू की जा रही थी तो भाजपा विपक्ष में थी। इसके बावजूद समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि गांव और शहर सभी जगह जब पूर्ण शराबबंदी करे, तभी यह अभियान सफल होगा। शराब एक बुराई है। समाज में देव और दानव तथा अच्छाई और बुराई के बीच हमेशा जंग जारी रहेगी। इसका यह मतलब नहीं है कि बुराई का समर्थन किया जाए।


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