पटना, (रिपोर्टर) :  बापू सभागार में आयोजित ‘इंडियन रोड कांग्रेस’ के 80 वें वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि इंजीनियरों को पर्यावरण के अनुकूल इको फ्रेंडली सड़कों के निर्माण व डिजायन पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। बिहार में 15 वर्षो तक जिन लोगों ने राज किया उनके कार्यकाल में सड़कों पर मात्र 6 हजार करोड़ रुपये खर्च किया गया जबकि एनडीए के 14 वर्षों में 1.40 लाख करोड़ खर्च किया गया है। केवल इस साल सड़कों पर 18 हजार करोड़ रुपये खर्च का प्रावधान है।

बिहार में सड़कों के निर्माण के दौरान बड़े पैमाने पेड़ों को काटने के बजाय दूसरी जगह प्रत्यारोपित करने का प्रयोग किया गया है। पटना के आर ब्लाॅक-दीघा रोड में यह सफल रहा है। इंजीनियरों से अपील की कि वे ऐसी डिजायन व तकनीक अपनाएं तथा एलाइनमेंट तैयार करें कि पेडों को़ काटे बिना निर्माण हो। इसके साथ ही निर्माण कराने वाले ठीकेदार को ही पेड़ लगाने की जिम्मेवारी दी जाए। भवन व पथ निर्माण विभाग में सड़कों के किनारे लगाए गए पेड़ों की देखभाल के लिए ‘ग्रीन कम्पोनेंट फंड’ का प्रावधान किया गया है। वर्षा जल को संरक्षित कर भूजल को रिचार्ज करने की व्यवस्था व बाढ़ से सड़कों का बचाव भी अहम है।

सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौत पर चिन्ता जताते हुए कहा कि हर साल देश में डेढ़ लाख से ज्यादा लोग दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। एनएच पर 35 व राज्य उच्च पथों पर 26 फीसदी जबकि अत्यधिक गति के कारण 66 प्रतिशत दुर्घटनाएं होती हैं। 2017 में बिहार में 5,554 लोग सड़क दुर्घटना में मारे गए थे। सड़कों व पुलों की डिजायन ऐसी हो कि यातायात निर्बाध व दुर्घटनारहित हो। 

दिल्ली में 18 प्रतिशत गाड़ियों के सिग्नल पर 1 से 3 मिनट तक रूकने से एक दिन में 7 लाख ली. पेट्रोल व 3.70 लाख ली. डीजल की बर्बादी के साथ ही भारी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन होता है। अनेक देशों में 30 सेकेंड से ज्यादा गाड़ी रोकने पर इंजन को बंद करने का कानूनी प्रावधान है। ईंधन की बर्बादी रोकने के लिए भारत में भी इस प्रकार का कानून बनना चाहिए।

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