राजगीर, (रिपोर्टर) :  गुरु नानक देव के 550 वें प्रकाश पर्व के अवसर पर के कृषि, पशुपालन व मत्स्य मंत्री डॉ प्रेम कुमार ने उनकी जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि  गुरु नानक देव जी भारत की वैभवशाली और विश्व-बन्धुत्व की समृद्ध परंपरा के अद्वितीय प्रतीक हैं। इनके व्यापक व्यक्तित्व में दार्शनिक, योगी, गृहस्थ, धर्मसुधारक, समाजसुधारक, कवि, देशभक्त और विश्वबंधुत्व आदि समस्त गुणों के दर्शन हो जाते हैं। उनकी शिक्षाएं और विचार हमें सदैव मानवता की सेवा के लिए प्रेरित करती है।
श्री कुमार ने आगे कहा, बचपन से प्रखर बुद्धि के धनी गुरुनानक देव जी ने एक ऐसे विकट समय में जन्म लिया जब भारत में कोई केंद्रीय संगठित शक्ति नहीं थी। विदेशी आक्रमणकारी भारत देश को लूटने में लगे थे। धर्म के नाम पर अंधविश्वास और कर्मकांड चारों तरफ फैले हुए थे। ऐसे समय में गुरु नानक देव जी ने अपने विचारों और दर्शन से पुरे समाज को सही मार्ग दिखा कर एकसूत्र में पिरोया। उन्होंने अपनी सुमधुर सरल वाणी से जनमानस के हृदय को जीत लिया। लोगों को बेहद सरल भाषा में समझाया सभी इंसान एक दूसरे के भाई है। ईश्वर सबके पिता है, फिर एक पिता की संतान होने के बावजूद हम ऊंच-नीच कैसे हो सकते है? इन्हीं सभी भ्रांतियों को दूर करने के लिए उन्होंने उपदेशों को अपने जीवन में अमल किया और चारों ओर धर्म का प्रचार कर स्वयं एक आदर्श बने। सामाजिक सद्भाव की मिसाल कायम की।
कृषि मंत्री ने कहा कि  यह गुरुनानक देव जी ही थे जिन्होंने ऊंच-नीच का भेदभाव मिटाने के लिए लंगर की परंपरा चलाई। जहां कथित अछूत और उच्च जाति के लोग एक साथ लंगर में बैठकर एक पंक्ति में भोजन करते थे। आज भी सभी गुरुद्वारों में यही लंगर परंपरा कायम है। लंगर में बिना किसी भेदभाव के संगत सेवा करती है। इसके अलावा गुरु नानक देव ने भारत सहित अनेक देशों की यात्राएं कर धार्मिक एकता के उपदेशों और शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार कर दुनिया को जीवन का नया मार्ग बताया। हकीकत में गुरु नानकदेव जी केवल सिख धर्म के संस्थापक ही नहीं, बल्कि  मानव धर्म के उत्थापक भी थे। वह केवल सिखों के आदि गुरु ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज के गुरु थे। पांच सौ पचास वर्ष पूर्व दिए उनके पावन उपदेशों का प्रकाश आज भी मानवता को आलोकित कर रहा है।
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