पटना, (रिपोर्टर) : श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के 353वें प्रकाश गुरु पर्व पर तख्त श्रीहरिमंदिर जी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में वाहे गुरुजी की खालसा, वाहे गुरूजी की फतेह से अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 353वें प्रकाश पर्व में शामिल सभी श्रद्धालुओं, जत्थेदारों एवं सेवादारों का स्वागत करता हूॅ। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर देश-विदेश से आए हुए श्रद्धालुओं को अपनी तरफ से बिहार सरकार की तरफ से एवं बिहारवासियों की तरफ से बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष 353वां प्रकाश गुरु पर्व मनाया जा रहा है। 350वें प्रकाश गुरु पर्व के मौके पर हम बिहारवासियों ने अपनी जिम्मेवारी समझकर जो कुछ भी संभव हुआ, आपके लिये किया। इसके बदले में देश एवं देश के बाहर सिख श्रद्धालु बिहार की काफी तारीफ करते हैं। गुरु गोविंद सिंह जी महाराज का जन्म इसी धरती पर हुआ है इसलिए हम सबों का फर्ज है कि सिख श्रद्धालुओं की सेवा करें। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 की जनवरी में 350वां प्रकाश गुरुपर्व मनाया गया और उसी वर्ष दिसबंर माह में 351वां प्रकाश गुरुपर्व मनाया गया जिसे हमलोगों ने शुकराना समारोह के रुप में मनाया। देश-विदेश से काफी संख्या में लोग यहां आए थे। उन्होंने कहा कि यहां आकर सभी लोगों को इस बात का एहसास होता है कि श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज सिर्फ सिख धर्म के ही गुरु नहीं बल्कि सबके गुरु थे।




मुख्यमंत्री ने कहा कि राजगीर में गुरु नानक देव जी महाराज के 550वें प्रकाश गुरु पर्व का आयोजन 27 से 29 दिसंबर 2019 तक किया गया, जिसमें लाखों की संख्या में देश एवं देश के बाहर के सिख श्रद्धालु आए थे। वहां के स्थानीय लोगों एवं बिहार सरकार की तरफ से जो कुछ भी संभव हुआ किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु नानक देव जी ने देश की चारो दिशाओं में यात्रा की थी, जिसे उदासी यात्रा के नाम से जाना जाता है। सबसे पहले पूरब दिशा की यात्रा कर बक्सर से गंगा नदी के द्वारा वे पटना आये थे। पटना में जैतामल जी उनके शिष्य बने थे जो मुक्ति चाहते थे। गुरु नानक देव जी ने कहा था कि हम फिर आयेंगे। इसके बाद नौवे गुरु, गुरु तेग बहादुर घोड़े पर सवार होकर वहां पहुंचे और खिडक़ी के माध्यम से बंद दरवाजे के अंदर पहुंचकर उसी स्थान पर बैठे, जहां गुरु नानक देव जी बैठे थे। तब जाकर जैतामल जी को मुक्ति मिली। गुरु तेग बहादुर को गुरु नानक देव जी का ही अवतार माना जाता है। अक्षम होने के कारण जैतामल जी के आग्रह पर गंगा माता ने गाय के रूप में खुद जैतामल जी के पास आकर प्रतिदिन उन्हें स्नान कराती थी, जिसके कारण पटना गंगा तट के उस जगह का नाम गायघाट पड़ा। पटना के बाद गुरुनानक देव जी गया, नवादा होते हुए होली के समय राजगीर पहुंचे थे। स्थानीय लोगों के अनुरोध पर उनके चरण स्पर्श मात्र से गर्म कुंड का पानी शीतल हो गया और तब से यह शीतल कुंड में तब्दील हो गया। राजगीर में शीतल कुंड के पास भव्य गुरुद्वारा का निर्माण हो रहा है, जिसका शिलान्यास किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु नानक देव जी महाराज के प्रकाश गुरुपर्व का आयोजन राजगीर में प्रतिवर्ष किया जाएगा। इस वर्ष गुरु गोविंद सिंह जी महाराज का 353वां प्रकाश गुरुपर्व और गुरु नानक देव जी महाराज का 550वां प्रकाश गुरुपर्व के लिए समय आसपास ही निर्धारित था। दोनों प्रकाष गुरूपर्व का समय आसपास रहने से पहले श्रद्धालु राजगीर में आ सकेंगे और उसके बाद पटना के आयोजन में भी आसानी से शामिल हो सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां कई गुरुद्वारे हैं, जिनकी अपनी-अपनी विशेषता है। गायघाट की भी अपनी अलग महत्ता है, बाल लीला गुरुद्वारा भी विषिष्ट है। गुरुद्वारा गुरु का बाग की भी अपनी खासियत है जहां गुरुगोविंद सिंह जी की पहली मुलाकात अपने पिता गुरू तेग बहादुर जी से हुई थी। यह जगह सूखा था लेकिन गुरु तेग बहादुर जी के आने के बाद यह बाग हरा भरा हो गया। कंगन घाट में भी गुरु गोविंद सिंह जी जाते थे। वहां भी नया गुरुद्वारा बनाया गया है, जिसके नए भवन का उद्धाटन हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे गुरु नानक जी की ज्ञान स्थली बेर साहेब में जाने का मौका मिला है। यह मेरे लिए बेहद प्रसन्नता की बात है। उन्होंने कहा कि मेरा निवेदन है कि आप सब श्रद्धालु प्रकाश गुरुपर्व के अवसर पर तो आएंगे ही, हमेषा बिहार आते रहें। बिहार गरीब राज्य है लेकिन हम मन से गरीब नहीं हैं। हम आप सबकी खिदमत में कोई कमी नहीं करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपलोगों के द्वारा जो सम्मान स्वरुप मुझे भेंट दी गई है उसके लिए आपका आभारी हूं। मैंने अपने परामर्शी श्री अंजनी कुमार सिंह से कहा है कि बिहार म्यूजियम में इन सब चीजों को रखवा दी जाए और गुरु गोविंद सिंह जी से संबंधित और उनसे जुडी हुई बातों की चर्चा भी कर दी जाए ताकि लोग इसके बारे में भी जान सकें। बिहार म्यूजियम देश में पहले अंतर्राष्ट्रीय स्तर का यह म्यूजियम बना है, जिसकी चर्चा देश के बाहर भी होती है। गुरु गोविंद सिंह जी महाराज से संबंधित प्रकाश पुंज का निर्माण इस वर्ष तक पूर्ण हो जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष श्रद्धालुओं के लिए टेंट सिटी में अच्छी व्यवस्था की गई थी। जानकारी दी गई है कि 5 हजार की क्षमता वाले टेंट सिटी में 7 हजार तक लोग भी आकर आराम से रहे हैं। किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं हुई है। इस प्रकाश पर्व के आयोजन को सफल बनाने में समाज के हर तबके का सहयोग है। उन्होंने कहा कि लंगर में जिस तरह से भोजन की व्यवस्था सबके लिए रहती है, उतना स्वादिष्ट भोजन अमीर लोग भी अपने घर में नहीं कर पाते हैं। यह सब गुरु की कृपा से ही संभव हो पाता है। उन्होंने कहा कि खत्री समाज के लोगों की कुछ मांगें हैं जिस पर काम किया जा रहा है उसके लिए परेशान होने की जरुरत नहीं हैं। श्रद्धालुओं की मांग पर प्रकाश गुरुपर्व के दौरान रेल सेवा की लगातार सुविधा के लिए भारत सरकार से निवेदन करुंगा। राज्य में सडक़ सेवा भी बेहतर है इससे श्रद्धालुओं को कोई परेशानी नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजगीर में अपने संबोधन के दौरान गुरु नानक देव जी के 10 दर्शनों की चर्चा की थी। उन्होंने कहा कि दशमेश पिता गुरु गोविंद सिंह जी महाराज सर्वंशदानी थे। उनके योगदान को पूरा देश, पूरी दुनिया नहीं भूला सकता है। हम सभी के मन में उनके प्रति इज्जत, सम्मान और श्रद्धा का भाव है। उन्होंने कहा कि बिहार में पर्यावरण संरक्षण के लिए जल-जीवन-हरियाली अभियान चलाया जा रहा है। एक तरफ जल है, एक तरफ हरियाली है तभी जीवन सुरक्षित है। जल का संरक्षण करना है और हरियाली को बढ़ावा देना है तभी आने वाली पीढिय़ों को सुरक्षित रखा जा सकता है। हम सबको पर्यावरण संरक्षण के लिए मिल जुलकर काम करना होगा। मेरी गुरु गोविंद सिंह जी महाराज से प्रार्थना है कि जल-जीवन-हरियाली के प्रति लोगों में जागृति आये।  मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु नानक देव जी, गुरु गोविंद सिंह जी ने समाज में प्रेम-भाईचारा, एकता का संदेश दिया था। हम सबको मिल-जुलकर भाई चारे के साथ रहना चाहिए। एक दूसरे के प्रति इज्जत का भाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम सबकी प्रार्थना है कि गुरु गोविंद सिंह जी महाराज का आशीर्वाद सदा दुनिया को मिलता रहे, हम सब पर सदैव उनकी कृपा बनी रहे।
इसके पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तख्त श्रीहरिमंदिर जी पटना साहिब में मत्था टेका। कार्यक्रम के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से आये जत्थेदारों, श्री हरिमंदिर जी प्रबंधक कमिटी द्वारा मुख्यमंत्री को ढाल, तलवार, अंगवस्त्र, सरोपा एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री ने तख्त श्री हरिमंदिर जी प्रबंधक कमिटी के कैलेंडर का भी विमोचन किया। कंगन घाट टेंट सिटी में बने लंगर हॉल में मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं को लंगर परोसने के बाद स्वयं लंगर छका। कार्यक्रम को पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव, सांसद बलबिंदर सिंह पुंद्र, सांसद प्रेम सिंह चंदु महाराज, शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी दिल्ली की अध्यक्ष बीबी रंजीत कौर, तख्त श्रीहरिमंदिर जी प्रबंधक कमिटी के अध्यक्ष सरदार अवतार सिंह जी हित, बाबा बलबीर सिंह निहंग ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर जत्थेदार इंद्रजीत सिंह जी यूके वाले, जत्थेदार मोहिंदर सिंह जी वर्मिन्घम यूके, बाबा कश्मीर सिंह जी भूरीवाले, ज्ञानी रणजीत सिंह गोहर, जत्थेदार अवतार सिंह, बाबा मोहिंदर पाल सिंह ढिल्लन, मुख्यमंत्री के परामर्शी अंजनी कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव उदय सिंह कुमावत, पटना प्रमंडल के आयुक्त संजय कुमार अग्रवाल, पटना प्रमंडल के पुलिस महानिरीक्षक संजय सिंह, अपर सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय चंद्रशेखर सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, पटना के जिलाधिकारी कुमार रवि, वैशाली की जिलाधिकारी श्रीमती उदिता सिंह, पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक उपेंद्र कुमार शर्मा सहित अन्य गणमान्य लोग, वरीय अधिकारीगण, सिख संगत, सेवादार एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित थे।
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