पटना, (रिपोर्टर) : माइक्रो लेप्रोस्कोपी की नई तकनीक पिन-होल्स सेएव्डोमनिल समस्याओं के पीडि़त मरीजों को राहत मिलेगा। स्वस्थ्य जीवन-शैली के लिए मोटापा से दूर, खराब डाइट, तनाव, चिंता से दूर रहने की जरूरत है। होटल मौर्या में पत्रकारों से वार्तालाप कर  पदमश्री डा. प्रदीप चौबे ने कहा कि गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल की विभिन्न बिमारियों के लिए लेप्रोस्कोपी उपयुक्त है। इस विधि से पथरी के मरीज कम अवधि तक अस्पताल में रहेंगे, साथ ही उनकी रिकवरी की गति में तेजी संभव है।
उन्होंने कहा कि लेप्रोस्कोपिक के पुराने विधि में 5 एमएम का चीरा लगाकर सर्जरी करने की तुलना में पिन होल स र्जरी कीप्रक्रिया विकसित व आसान प्रक्रिया है। पटना और पड़ोसी क्षेत्र के लोग आसानी से इस प्रक्रिया का लाभ उठा सकते हैं। माइक्रो लेप्रोस्कोपी कोलेसिस्टेकॉमी सुरक्षित व अन्य मिनिमली इनवेसिव प्रक्रियाओं का नया विकल्प है। इसमें दर्द व घाव न के बराबर होते हैं। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ साइटिफिक  अनुसार भारत में पथरी की समस्या 41-50 की उम्र वालों में 26.7 प्रतिशत  पायी गयी जिसमें सबसे ज्यादा बिहार का मरीज शामिल था। पथरी बायोप्रोडक्ट है। राज्य सरकार को प्राइमरी हेल्थ केयर पर ध्यान देना चाहिए। इस अवसर पर संदीप शर्मा, समीर पोद्दार समेत अन्य उपस्थित थे।

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