फतुहा, (रिपोर्टर) : जब से लोग धरती पर आये तब से अंग्रेजी दवाओं का फिलहाल में जानकर जागरूक हो रहे हैं। मगर होमियोपैथी  को गांव-कसबा में इसी दवा से आराम मिलती थी। होम्योपैथी दवा मुंह में खिलाया जाता है। पटना में  होम्योपैथी अस्पताल में डा. लक्ष्मी नारायण सिंह नस में दवा देते हैं जिससे मरीजों को काफी आराम मिलती है। डा. सिंह ने कहा कि आज भी लोगों के घरों में गंध बिखेरने वाला तेल नहीं रखना चाहिएद्ध। सफेद दाग वाले सुनबहरी-कुष्ट वाले रोगी मांस नहीं खायें। जिस मकान में मांस बनाया जाता है वहां पर कुष्ट रोगी नहीं रहें।
उन्होंने पॉलिस युक्त चावल जर्सी गाय का दूध, चीनी, रिफाइन, तेल-मैदा, फ्रीज का पानी, प्लास्टिक बोतल का पानी, कोका-कोला, स्प्राइट एवं थमसप का इस्तेमाल नहीं करे। उनहोंने कहा कि घरेलू महिलाएं खाना बनाने के लि ए एलुमिनियम बर्तन का इस्तेमाल नहीं करें। स्वास्थ्य विभाग को इसके बारे में लोगों को जागरूक करना चाहिए। खड़ा होकर पानी पीने से गठिया रोग होता है किसी को गैस्टिक है तो चार ग्लास पानी गर्म करके चाय की तरह धीरे-धीरे पीयें। अगर बिच्छू काट लिया हो तो नमक का पानी दो बूंद आंख में डाल दें। उन्होंने कहा कि अनेकों तरह से लोग परहेज करेंगे तो उन्हें अंग्रेजी दवाओं का सेवन नहीं करना पड़ेगा।

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