पटना, (रिपोर्टर) : अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अगले 10 वर्षों तक के आरक्षण बढ़ाये जाने हेतु बिहार विधान मंडल के दोनों सदन में महत्वपूर्ण संविधान के 126वें संशोशन विधेयक एक्ट सत्ता एवं प्रतिपक्ष में सर्वसम्मति से पारित कर दी गयी। जिससे लोकसभा एवं विधानसभा में आरक्षित एससी-एसटी सदस्यों का लाभ मिलेगा। जिसका प्रस्ताव संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने लाया, जिस पर सभाी सदस्यों ने भेद भाव किये बिना सर्वसम्मिति से पारित कर दिया।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सर्वसम्मति से विशेष विधानसभा सत्र में लाये गये एससी-एसटी एक्ट पारित होने पर सभी सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि एससी-एसटी के विभिन्न जाति जिसको लोकसभा एंव विधानसभा के सीटों पर 10 वर्षों तक के लिए अगले जनवरी 2030 तक के लिए बढ़ा दी गयी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हम एनआरसी संशोधन एक्ट के पक्ष में नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी एनआरसी कानून पर कोई चर्चा नहीं हुई, जिसका वक्तव्य दे चुके है। सरकार चाहती है कि देश में जातीय जनगणना  से स्पष्ट होगा एससी-एसटी कितनी संख्या है। 2010 के जनगणना में अलग से होने के कारण कास्ट वेश का पता नहीं चला। हमारी सरकार चाहती है कि अगले सत्र में इन महत्वपूण बिन्दुओं पर चर्चा हो सके। उन्होंने जल जीवन हरियाली पर चर्चा करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने इसी  सदन में सर्वसम्मिति से विर्मश कर प्रस्ताव पास किया था। तालाब पोखर एवं आहरपईन पर अतिक्रमण  मुक्त करते समय बसे  लोगों को अन्य जगहों पर बसाया जायेगा। राज्य सरकार भू-जल को बचाने के लिए  प्रस्ताव लायेगी।
उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि अगर देश में एससी-एसटी जैसे महत्वपूर्ण एकट हो 100 वर्षों तक जारी रखने की जरूरत पड़ेगी तो सरकार पीछे नहीं रहेगी। 2011 के जनगणना के बाद 25 प्रतिशत आबादी एससी-एसटी समुदाय के लोगों का है। यह महात्मा गांधी एवं अम्बेदकर के समझौता का परिणाम है जो आरक्षण लागू किया गया। एनडीए सरकार ने एससी-एसटी के नौकरियों में प्रामोशन से संबंधित प्रस्ताव इसी सदन में लागू किया गया है। हमारी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है इस बिल का समर्थन करता हॅू।
प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने सदन में एससी-एसटी बिल को समर्थन करते हुए कहा कि इस बिल को स्थायी रूप से लागू कर दी जाये। हम इसका  समर्थन करता हॅू। वहीं विशेष सत्र के माध्यम से जातीय जनगणना कराने जैसे बिल सदन में लायी जानी चाहिए। एससी-एसटी बिल के साथ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति अपने मांगों को लेकर सदन से सडक़ तक प्रदर्शन करते हैं लेकिन उनका अधिकार नहीं मिलता, इस महत्वपूर्ण  विषय पर चर्च होनी चाहिए। उन्हांने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कहा कि जब उपमुख्यमंत्री थे तो मुख्यमंत्री हमेशा कहा करते थे कि ये लोग आरएसएस वाले हैं इनसे  लम्बी लड़ाई लडऩे की जरूरत है। इस पर स्थिति मुख्यमंत्री जी को स्पष्ट करनी चाहिए। उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में एनआरसी बिल लाकर देश को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है जिससे देश जल रहा है। एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी कहते हंै कि एनआरसी पर कोई चर्चा नहीं है तो दूसरी ओर गृहमंत्री अमित शाह जी कहते हैं कि इसे हर हाल में लागू किया जायेगा। इस मसले पर सुशील मोदी जी की दोहरी नीति किसके साथ है इसे स्पष्ट करना चाहिए।
कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह ने कहा कि देश में एसी-एसटी समाज के लोग मुख्यधारा से काफी पीछे थे तो कांग्रेसी सरकार ने संसद के संशोधन एक्ट में प्रावधान कर 40 वर्षों तक आरक्षण का प्रावधान करते हुए आगे बढ़ाने का  प्रस्तव पारित किया गया था हम लोग दल से ऊपर उठकर समर्थन करते हैं। माले विधायक दल के नेता महबूब आलम ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि केन्द्र की एनडीए सरकार ने आरक्षण का गला घोट रही है। 49 प्रतिशत आरक्षण के बाद 10 प्रतिशत सवर्ण कहां से आ गया। प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री का  एनआरसी पर अलग-अलग बयान है इसको स्पष्ट करनी चाहिए।

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