नई दिल्ली, (रिपोर्टर) :  बेंगलुरु में अदम्य चेतना संस्था  कार्यक्रम को संबोधित कर   उपराष्ट्रपति एम. वेकैंया नायडु ने कहा कि पिछले सात दशकों में विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति के बावजूद कुपोषण एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। यह बहुत दुख की बात है कि देश में 35.7 प्रतिशत बच्चों का वजन सामान्य से कम है और 38.4 प्रतिशत का शारीरिक विकास पूरी तरह नहीं हो पाया है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि विभिन्न अध्ययनों के माध्यम से यह पता चला है कि बच्चों में पोषण की स्थिति का सीधा प्रभाव शिक्षा के क्षेत्र में उनके प्रदर्शन पर पड़ता है। पोषणयुक्त भोजन न मिलने के कारण दिमाग का समुचित विकास नहीं हो पाता है, जिससे सीखने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है। इसके अलावा शरीर की रोगों से लडऩे की क्षमता घट जाती हैए जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। श्री नायडु ने कहा कि कुपोषण गरीबी का एक कुचक्र बनाता है और आर्थिक प्रगति को प्रभावित करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चों और किशोरों के स्वस्थ मानसिक और शारीरिक विकास के लिए कुपोषण की समस्या से निपटने के तत्काल उपाय किए जाने चाहिए। आराम पसंद जीवन शैली और खराब खान-पान की आदतों को गैर-संचारी रोगों के बढ़ते मामलों की मुख्य वजह बताते हुए श्री नायडु ने कहा कि इस बारे में युवाओं को जागरुक बनाने की आवश्यकता है। उन्हें खराब खान-पान की आदतों को छोडऩे तथा शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के तौर.तरीकों के बारे में बताया जाना चाहिए। कार्यक्रम में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री सी.एन. अश्वथ नारायण, बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या, अदम्य चेतना संस्था के प्रबंधन न्यासी तथा अध्यक्ष डॉ. तेजस्विनी अनंत कुमार और संस्था से जुड़े कई अन्य लोग उपस्थित थे।

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