रांची, (रिपोर्टर) : विधानसभा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार एक समावेशी झारखंड के निर्माण की दिशामें दृढ़तापूर्वक आगे बढ़े और सबको हक मिले, इसका पूरा प्रयास करेगा। नौकरशाही को जनता के प्रति जिम्मेवार बनाने के लिए कृत संकल्पित है। ऐसा माहौल बनाया जायेगा ताकि सरकारी कर्मी भयमुक्त होकर मनोबल के साथ काम करें। राज्य के खजाने पर पहला अधिकार गरीबों का है सभी विभागों में पारदर्शिता तथा ईमानदारी पूर्वक काम होने पर अरबों रुपया बचाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि यह सरकार सबों को सुनने वाली है। सदन अनुभव और युवा ऊर्जा का अद्भूत संगम है उसका समन्वय करना सरकार की बड़ी चुनौती है। मैं मुख्यमंत्री के रूप में नहीं बल्कि शोषण के विरूद्ध संघर्ष और शहादत के प्रतीक चिन्ह के रूपमें खड़ा हॅू। झारखंड आन्दोलनकारियों के सपना, वंचितों, गरीबों, आदिवासियों, दलितों, अल्पसंख्यकों युवा एवं महिलाओं की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती सिर्फ सरकार के समक्ष हीनहीं बल्कि सदन के सामने भीी है। संख्या बल के आधार पर जन आकांक्षा को रौंदा नहीं जा सकता। गरीबों के संवैधानिक सुरक्षा कवच पर हमला नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के प्रहरी मीडिया के संस्थानों से स्वस्थ्य एवं सकारात्मक आलोचनाओं को आमंत्रित करता है। मेरे लिए यह आलोचना आइना होगा। लक्ष्यों से भटकाव को भांपकर गलतियों को समय रहते  पहचान सकेगी। संघर्ष से तय कर निकलने वाला वेशकीमती संपत्ति अर्जित करता है। आलोचना  वह आईना होगी जिसमें सरकार अपना चेहरा साफ देख सकेगी। इसे सत्ता के पिंजरे में कैद नहीं किया जा जायेगा। राज्य सरकार का विकास कार्य अखबार और टीवी पर केवल नहीं दिखेगा बल्कि गरीबें के चूल्हे और चेहरे पर चमकने वाला होगा।

उन्होंने कहा कि अनुपूरक बजट से आंगनबाड़ी, परा  शिक्षक, वृद्धावस्था पेंशन, मदरसा शिक्षक, छात्रवृति, जन जातीय पेंशन, राष्ट्रीय स् वास्थ्य बीमा योजना, कौशलविकास की व्यवस्था  ठेकेदार वाली विभाग से धन काटकर किया जायेगा जो सर कार की भावी रणनीति का संकेत होगा। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष तक विपक्ष का नेता रहा। जनता के दुख-दर्द को जान कर कारणों को समझने का प्रयास किया। शिक्षा, स्वास्थ्य रोजगार, जैसे मौलिक सुविधाओं और अधिकारों से जनता की दूरी होने का अहसास हुआ। हमारे राजनीतिक सहयोगी इसमें विफल रहे। यह सरकार सबकी सुनने वाली होगी, पक्ष हो या विपक्ष।


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