पटना, (रिपोर्टर) : प्रतिपक्ष केनेता तेजस्वी यादव ने कहा कि  बिहार में युवाओं के लिए विस्फोटक स्थिति पैदा हो गयी है। नीतीश सरकार आंकड़ो को छुपाने, उन्हें झुठलाने, कॉन्सपिरेसी थ्योरी गढऩे और ध्यान भटकाने के षड्यंत्र करने के बजाय अगर अपना ध्यान युवाओं को नौकरी देने में लगाए तब शायद युवाओं का कुछ भला हो पाए। जिस तरह देश और बिहार में बेरोजगारी दर में लगातार वृद्धि हो रही है, यह स्थिति देश में अराजक ही नहीं, विस्फोटक भी सिद्ध हो सकती है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि सत्तारूढ़ दल युवाओं की बेरोजगारी में अपनी साम्प्रदायिक राजनीति के लिए सुअवसर देख रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार मोदी सरकार के 6 वर्षों में रोजग़ार के अवसर उत्पन करने की बजाय सरकार के द्वारा समाप्त कर दिए गए। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने में समस्त भारतीय उपमहाद्वीप में सबसे पिछलग्गू देश भारत ही रहा है। एनडीए सरकार की आत्मघाती अर्थनीति के कारण भारत बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और श्रीलंका से भी पिछड़ गया है। केंद्र और राज्य सरकार रोजग़ार के अवसरों का सृजन करने में पूरी तरह विफल रही है। जिसका खामियाजा देश की अर्थव्यवस्था को और अन्ततोगत्वा देश के युवाओं को उठाना पड़ रहा है।  वैसे सरकार के पास उपलब्ध योग्यता, उनकी प्राथमिकताओं और अब तक के ट्रैक रिकॉर्ड से यह होता दिखता तो है नहीं।  मंदिर-मस्जिद व हिंदू-मुसलमान से बड़ा मुद्दा नौकरी,शिक्षा-स्वास्थ्य और स्कूल-अस्पताल है। नीतीश सरकार ने बिहार को बेरोजगारी का मुख्य केंद्र बना दिया है। यह देश के लिए दुर्भाग्य है और बहुत बड़ी विडंबना ही है कि जो केंद्र सरकार यह वादा करते हुए बनी थी कि वह हर वर्ष दो करोड़ युवाओं को रोजगार देगी, उसी सरकार ने देश के युवाओं को रोजग़ार के मामले में 45 वर्षों का सबसे बुरा दौर दिखाया है। जिन युवाओं को रोजगार के बूते सुनहरे भविष्य का सपना दिखाया गयाए आज उन्हीं युवाओं को हिन्दू-मुसलमान, भारत-पाकिस्तान जैसे मुद्दों में उलझानाए अपने भविष्य की चिंता से भटकाना भाजपा की चुनावी रणनीति और केंद्र सरकार की मजबूरी बन गई है।

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