पटना, (रिपोर्टर) : बिहार राज्य उच्चतर माध्यमिक अतिथि शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष  नरेंद्र कुमार  ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी से मांग किया है कि 4203 अतिथि शिक्षकों की सेवा को अब  परमानेंट कर देना चाहिए इसकी घोषणा अभी चलने वाली सदन में कर देनी चाहिए साथ में बिहार के शिक्षा विभाग पर यह भी आरोप लगाया है शिक्षा विभाग के आला अधिकारी दोहरी नीति अपना रहे हैं एक तरफ  इंटर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य के लिए वित्त रहित शिक्षकों की सहायता लिया जा रहा है दूसरी तरफ शिक्षा विभाग के अपने शिक्षक जो सरकारी प्लस टू विद्यालयों में अतिथि शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं और उनका शिक्षण अनुभव तकरीबन 2 साल पूरा होने जा रहा है बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के गाइडलाइन के अनुसार इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए सारे 4203 अतिथि शिक्षक योग्य हैं फिर भी इन शिक्षकों को मूल्यांकन कार्यों में नहीं लगाया जाना विभाग का तानाशाही प्रतीत होता है।  उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि बिहार के शिक्षा विभाग के आला अधिकारी जो सचिवालय में बैठे हैं प्रधान सचिव से लेकर निदेशक, उपनिदेशक तक सारे लोग शिक्षकों का घोर विरोधक है यही कारण है कि अपने विद्यालय के शिक्षकों को मूल्यांकन कार्य में ना लगा कर वित्त रहित शिक्षकों से मूल्यांकन कार्य कराया जा रहा जबकि बिहार के पुरे 4203 अतिथि शिक्षक इंटरमीडिएट उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने के लिए कई बार शिक्षा मंत्री एवं शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों गुहार लगाई है।  परंतु अभी तक इस पर विभागीय अधिकारियों के द्वारा कोई नोटिस नहीं ली गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि जहां-जहां नियोजित शिक्षकों पर 2 स्कूल चल रही है वहां स्कूल खोलकर 11वीं और 12वीं के छात्रों को अध्यापन कार्य कराना अतिथि शिक्षकों के लिए कठिन कार्य हो गया है बार-बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मार्गदर्शन मांगने के बावजूद भी इस पर कोई अभी तक मार्गदर्शन प्राप्त नहीं हुआ जो दुर्भाग्यपूर्ण प्रतीत होता है।


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